आज हम गूगल मैप्स की मदद से एक क्लिक में रास्ता ढूंढ लेते हैं, लेकिन इसके पीछे सदियों पुरानी वैज्ञानिक खोजों का योगदान है। ऐसी ही एक महान खोज नौवीं सदी के प्रसिद्ध मुस्लिम वैज्ञानिक अबू अब्बास अहमद बिन मोहम्मद अल-फरगानी ने की थी, जिन्हें पश्चिमी दुनिया में अल-फ्रैगनस के नाम से जाना जाता है। अल-फरगानी का जन्म मध्य एशिया के फरगाना क्षेत्र में हुआ था। वे अब्बासी खलीफा अल-मामून के दौर में बगदाद के वैज्ञानिक केंद्र से जुड़े थे, जहां गणित और खगोल विज्ञान पर शोध होता था। उनका सबसे महत्वपूर्ण कार्य पृथ्वी की परिधि (सरकमफ्रेंस) का मापन था।
खलीफा के आदेश पर अल-फरगानी और उनकी टीम ने सिन्जार के रेगिस्तान में एक डिग्री की दूरी मापकर पृथ्वी का आकार निकाला। इस प्रयोग से पृथ्वी की परिधि लगभग 25 हजार मील निकली, जो आधुनिक गणना से बहुत करीब थी। उस समय यह उपलब्धि असाधारण मानी जाती थी। जहां पहले ग्रीक और भारतीय विद्वानों की गणनाओं में बड़ी त्रुटियां थीं, वहीं अल-फरगानी की गणना में एक प्रतिशत से भी कम गलती थी। आज के सैटेलाइट और नेविगेशन सिस्टम की नींव इसी शोध पर टिकी है। अल-फरगानी का योगदान साबित करता है कि सच्चा विज्ञान समय के साथ कमजोर नहीं होता, बल्कि और मजबूत होता है।