केंद्र सरकार शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए अब पढ़ाई में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) टूल्स को शामिल करने की तैयारी कर रही है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बताया है कि अगले शैक्षणिक सत्र से प्री-प्राइमरी से लेकर उच्च शिक्षा तक एआई का उपयोग बढ़ाया जाएगा। इसका उद्देश्य छात्रों को तकनीक के माध्यम से बेहतर और व्यक्तिगत शिक्षा उपलब्ध कराना है।
इस दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए आईआईटी मद्रास में 500 करोड़ रुपये के बजट से एजुकेशन के लिए एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना की गई है। यह केंद्र शिक्षा से जुड़े नए डिजिटल टूल्स और रिसर्च को बढ़ावा देगा। इस पहल के अंतर्गत बोधन एआई द्वारा ‘भारत एडु-एआई स्टैक’ विकसित किया जाएगा। इसे डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के रूप में तैयार किया जाएगा, ठीक उसी तरह जैसे भुगतान के लिए यूपीआई काम करता है। इस प्लेटफॉर्म पर भारतीय भाषाओं में स्पीच रिकग्निशन और वॉइस आधारित लर्निंग टूल्स बनाए जाएंगे।
छात्रों और शिक्षकों को होगा फायदा
एआई टूल्स की मदद से छात्र अपनी मातृभाषा में पढ़ाई कर सकेंगे। मोबाइल, टैबलेट या लैपटॉप के जरिए वे अभ्यास कर पाएंगे और सिस्टम उनकी गलतियों को पहचानकर सुधार के सुझाव देगा। वहीं शिक्षकों को छात्रों की प्रगति पर रिपोर्ट और फीडबैक मिलेगा, जिससे वे बेहतर मार्गदर्शन कर सकेंगे। प्रशासन को भी डाटा के आधार पर कमजोर क्षेत्रों की पहचान करने में मदद मिलेगी।
डाटा सुरक्षा और भविष्य की योजना
सरकार ने स्पष्ट किया है कि छात्रों का निजी डाटा सुरक्षित रहेगा और उसे सार्वजनिक प्लेटफॉर्म पर साझा नहीं किया जाएगा। यह पूरी योजना NEP 2020, NCERT और SCERT के ढांचे पर आधारित होगी। सरकार का लक्ष्य एक स्वदेशी, सुरक्षित और मजबूत एआई इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना है, जिससे भविष्य में भारतीय शिक्षा प्रणाली और अधिक प्रभावी व समावेशी बन सके।
