जब आधुनिक युग में रोबोटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की चर्चा होती है, तो अक्सर यह समझा जाता है कि यह विज्ञान पश्चिमी दुनिया की देन है। जबकि सच्चाई यह है कि रोबोटिक्स और मैकेनिकल इंजीनियरिंग की नींव सदियों पहले इस्लामी स्वर्ण युग में रखी जा चुकी थी। इस क्षेत्र के सबसे महान वैज्ञानिकों में इस्माइल अल-जज़री का नाम अग्रणी है, जिन्हें विश्वभर में रोबोटिक्स और ऑटोमेशन का अग्रदूत माना जाता है। इस्माइल अल-जज़री 12वीं सदी में मेसोपोटामिया के जज़ीरा क्षेत्र में आर्तुक़ी वंश के दरबार से जुड़े थे और उन्होंने इंजीनियरिंग, गणित, कला और यांत्रिकी के क्षेत्र में अद्भुत योगदान दिया। वे एक महान विद्वान ही नहीं, बल्कि व्यावहारिक आविष्कारक भी थे।
50 से अधिक यांत्रिक उपकरणों और ऑटोमेटा का विस्तृत विवरण किया प्रस्तुत
उनकी प्रसिद्ध पुस्तक “किताब फ़ी मआरिफ़त अल-हियल अल-हंदसिया” (The Book of Knowledge of Ingenious Mechanical Devices) मध्यकालीन इस्लामी विज्ञान की अमूल्य धरोहर मानी जाती है। इस ग्रंथ में उन्होंने 50 से अधिक यांत्रिक उपकरणों और ऑटोमेटा का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया है। इनमें पानी से चलने वाली घड़ियां, जल उठाने की मशीनें, संगीत बजाने वाले यांत्रिक उपकरण और मानवाकार रोबोट शामिल हैं। अल-जज़री की विशेषता यह थी कि उन्होंने प्रत्येक यंत्र की चित्रात्मक व्याख्या और निर्माण विधि विस्तार से बताई। उन्होंने क्रैंकशाफ्ट, गियर सिस्टम, वाल्व, फीडबैक मैकेनिज़्म और प्रोग्रामेबल नियंत्रण जैसी तकनीकों का प्रयोग किया, जो आज की आधुनिक मशीनों और रोबोटिक्स का आधार हैं।
यूरोप में घड़ी निर्माण और ऑटोमेटा तकनीक के विकास को गहराई से प्रभावित
इतिहासकारों के अनुसार, अल-जज़री की पुस्तक ने यूरोप में घड़ी निर्माण और ऑटोमेटा तकनीक के विकास को गहराई से प्रभावित किया। उनके आविष्कार यह प्रमाणित करते हैं कि इस्लामी सभ्यता केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक और तकनीकी दृष्टि से भी अत्यंत समृद्ध थी।
इस्लामिक साइंस सीरीज़ का यह अध्याय हमें यह याद दिलाता है कि आधुनिक विज्ञान की जड़ें गहराई से हमारे इतिहास में समाई हुई हैं, और इस्माइल अल-जज़री जैसे वैज्ञानिक मानव सभ्यता के सच्चे वास्तुकार थे।
