जयपुर | विशेष संवाददाता
इस लेख में हम आपके साथ मुकद्दस क़ुरान से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कर रहे हैं। ये जानकारी इन दिनों सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रही हैं। इन संदेशों में क़ुरान की बुनियादी समझ को बढ़ावा दिया जा रहा है।
वायरल संदेशों के अनुसार, क़ुरान ए पाक कुल 30 पारों में विभाजित है और इसकी सात मंज़िलें हैं, जिनके जरिए इसे हिस्सों में पढ़ा और समझा जाता है। क़ुरान में कुल 114 सूरतें हैं — इनमें 86 सूरतें मक्की हैं जबकि 28 सूरतें मदनी हैं। इसके अलावा कुरान में 558 रुकू हैं, जो नमाज़ और तिलावत के दौरान सहूलियत प्रदान करते हैं। आयतों की कुल संख्या 6,236 बताई जाती है, हालांकि कुछ विद्वानों में इस पर मामूली मतभेद भी पाया जाता है।
क़ुरान और विज्ञान का अनोखा संगम
क़ुरान की सबसे बड़ी सूरह “सूरह बकरा” है, जिसमें सबसे अधिक आयतें हैं, जबकि “सूरह कौसर” सबसे छोटी सूरह मानी जाती है। क़ुरान करीब 23 वर्षों की अवधि में नाज़िल हुआ और इसे हमारे रब की ओर से फरिश्तों के सरदार जिब्रील (अ.व.) अंतिम पैगंबर मुहम्मद (स.अ.व.) पर उतारा गया। सोशल मीडिया पर एक युवक (जिसने हाल ही में इस्लाम कबूल किया है) का वीडियो भी खूब चर्चा में है, जिसमें वह क़ुरान और आधुनिक विज्ञान के बीच समानताएं बताता है। क़ुरान में “पुरुष” और “महिला” शब्द 23-23 बार आए हैं, जो मानव शरीर में मौजूद 23 जोड़ी क्रोमोसोम से मेल खाते हैं।
क़ुरान में “दिन” शब्द 365 बार और “महीना” शब्द 12 बार आया है
इसी तरह, क़ुरान में “जमीन” शब्द 13 बार और “समुद्र” शब्द 32 बार आया है। इन दोनों को जोड़ने पर योग 45 होता है। इससे समुद्र का प्रतिशत लगभग 71.11% और जमीन का 28.88% निकलता है — जो आधुनिक विज्ञान के अनुसार पृथ्वी की सतह पर 71% पानी और 29% जमीन के तथ्य के बेहद करीब है। क़ुरान में “दिन” शब्द 365 बार और “महीना” शब्द 12 बार आया है, जो वर्तमान कैलेंडर प्रणाली के अनुरूप है। इसके अलावा क़ुरान में ब्रह्मांड के फैलने का भी उल्लेख मिलता है, जिसे आधुनिक विज्ञान ने पिछले 200 वर्षों में खोजा है। करीब 1400 साल पहले अवतरित हुई इस किताब में इतने सटीक तथ्यों का होना महज संयोग नहीं हो सकता।
युवाओं में बढ़ रही जागरूकता
धार्मिक विशेषज्ञों का मानना है कि हर मुसलमान को क़ुरान को सिर्फ पढ़ना ही नहीं, बल्कि उसके अर्थ और संदेश को समझने का भी प्रयास करना चाहिए। सोशल मीडिया पर इस तरह की सकारात्मक और जानकारीपूर्ण सामग्री का फैलना समाज में दीन की महत्वपूर्ण जानकारी को बढ़ावा देने का काम कर रही है। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि जितना अधिक युवा वर्ग अपने दीन के साथ जुड़ेगा, उतना ही वह एक मजबूत और जागरूक समाज का निर्माण कर सकेगा।
