वॉशिंगटन/गजा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का महत्वाकांक्षी ‘बोर्ड ऑफ पीस’ वॉशिंगटन में अपनी पहली बैठक करने जा रहा है, जिसमें करीब 60 देशों को आमंत्रित किया गया है। इस बैठक में गजा पट्टी के लिए ट्रम्प की शांति योजना पर रिपोर्ट पेश की जाएगी। ट्रम्प ने कहा है कि बोर्ड का मिशन केवल गाजा तक सीमित नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में शांति स्थापित करना है। जर्मन न्यूज एजेंसी के मुताबिक करीब 60 देशों को बोर्ड में शामिल होने का न्योता भेजा गया था, जिनमें से लगभग 27 देशों ने सहमति दी है। अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर माइली और हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ऑर्बन जैसे नेता इसमें शामिल होंगे। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री भी बैठक में भाग लेंगे। हालांकि कई यूरोपीय देशों ने इसे ट्रम्प का निजी प्रोजेक्ट बताकर शामिल होने से इनकार कर दिया है। मिडिल ईस्ट और यूरोप के कई देश केवल निचले स्तर के अधिकारी भेज रहे हैं।
ट्रम्प के पास होगा पूरा नियंत्रण
बोर्ड के चार्टर के अनुसार ट्रम्प को इनॉगुरल चेयरमैन नामित किया गया है और यह पद लाइफटाइम उनके द्वारा चुने गए उत्तराधिकारी तक बना रह सकता है। उनके पास वीटो पावर है। बोर्ड के सदस्यों को जोड़ने, हटाने, एजेंडा तय करने और ग्रुप भंग करने तक का पूरा नियंत्रण ट्रम्प के पास रहेगा। राष्ट्रपति पद समाप्त होने के बाद भी वे चेयरमैन बने रह सकते हैं। हालांकि टाइम्स ऑफ इजराइल के मुताबिक बोर्ड के शुरुआती दस्तावेज में गजा का स्पष्ट उल्लेख तक नहीं है।
हमास ने फिर मजबूत की गजा पर पकड़
इस बीच जमीनी हालात चिंताजनक हैं। अक्टूबर में सीजफायर लागू होने के बाद हमास ने गाजा के अंदरूनी मोर्चे पर अपनी स्थिति फिर से मजबूत कर ली है। बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार गाजा के एक कार्यकर्ता ने बताया कि हमास ने उन क्षेत्रों के 90% से अधिक हिस्से पर दोबारा नियंत्रण हासिल कर लिया है जहां वह सक्रिय है। हमास की पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां सड़कों पर लौट आई हैं और अपने विरोधियों पर कार्रवाई कर रही हैं। ऐसे में ट्रम्प की शांति योजना कितनी कारगर होगी, यह बड़ा सवाल बना हुआ है। दुनिया की निगाहें अब वॉशिंगटन बैठक के नतीजों पर टिकी हैं।
