आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में इंसान अक्सर अपनी परेशानियों और तकलीफों में इतना उलझ जाता है कि उसे अपने आसपास मौजूद अनगिनत नेमतें दिखाई ही नहीं देतीं। ऐसे में ज़रूरत है कि हम तन्हाई में कुछ पल निकालकर अपने आप पर गौर करें और यह सोचें कि हम क्या कर रहे हैं और किस ओर जा रहे हैं। सांस लेना, चलना, देखना, सुनना—ये सब ऐसी नेमतें हैं जिन्हें हम रोज़मर्रा में मामूली समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि हर एक सांस रब की बड़ी रहमत है। अगर इंसान अपनी सफरिंग यानी परेशानियों की तुलना अपनी ब्लेसिंग्स से करे, तो एहसास होगा कि दुख कितने छोटे हैं। हमारे पास हाथ हैं, पैर हैं, हम चल-फिर सकते हैं, बैठ सकते हैं, सोच सकते हैं—ये सब अपने आप में बड़ी दौलत हैं। हमारे पास पीने के लिए पानी और खाने के लिए भोजन है, जबकि दुनिया में ऐसे लाखों लोग हैं जिन्हें इनमें से एक चीज़ भी मयस्सर नहीं। किसी के पास खाना नहीं है तो किसी के पास साफ पानी नहीं है, तो कहीं इलाज की सुविधा तक नहीं है।
रब हर लम्हा हमें अपनी नेमतों में रखे हुए है, फिर भी हम उसी रब का इनकार करने लगते हैं, शिकायतें कर