एफआर न्यूज. फतेहपुर शेखावाटी। लोहार समाज ने शादियों में बढ़ते फिजूलखर्च और डीजे संस्कृति पर अंकुश लगाने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की है। मक्का मस्जिद के पास लोहारों के मोहल्ले में ईशा की नमाज के बाद आयोजित एक बड़ी सामुदायिक बैठक में समाज के सभी वर्गों ने सादगीपूर्ण विवाह को बढ़ावा देने का संकल्प लिया। रफीक मोसमदीन लोहार के घर हुई पूर्व बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसरण में आयोजित इस महासभा में युवा, बुजुर्ग और महिलाओं ने सक्रिय भागीदारी की। मुफ्ती शौकत अली खान की उपस्थिति ने इस सामाजिक पहल को धार्मिक और नैतिक समर्थन प्रदान किया।
आर्थिक बोझ से मुक्ति का प्रयास
बैठक में समाज के प्रतिनिधियों ने शादियों में अनावश्यक डीजे, भव्य आयोजन और दिखावे की संस्कृति पर चिंता व्यक्त की। उनका मानना है कि यह फिजूलखर्ची आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर भारी बोझ डालती है, जो अक्सर कर्ज लेकर सामाजिक दबाव में शादियां करने को मजबूर होते हैं। समाज के वरिष्ठ सदस्यों ने कहा कि खर्च में कटौती से गरीब परिवारों को मानसिक और सामाजिक दबाव से राहत मिलेगी। बचत की गई राशि का उपयोग बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य आवश्यक जरूरतों में किया जा सकेगा।
बेटियों के प्रति सोच बदलने की दिशा में कदम
इस पहल का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य दहेज प्रथा और लड़की को बोझ मानने की सामाजिक सोच में बदलाव लाना भी है। सीमित खर्च और सादगी से बेटी के माता-पिता पर आर्थिक दबाव कम होगा और समाज में सकारात्मक संदेश जाएगा।
समाज में समानता की दिशा
बैठक में यह भी तय किया गया कि समाज में अमीर-गरीब के बीच की खाई को पाटने के लिए सभी के लिए समान नियम लागू होंगे। सामूहिक विवाह, सीमित मेहमानों की संख्या और व्यंजनों में कटौती जैसे कदम उठाए जाएंगे। मुफ्ती शौकत अली खान ने धार्मिक दृष्टिकोण से इस पहल को इस्लामिक शिक्षाओं के अनुरूप बताते हुए कहा कि सादगी और किफायत इस्लाम की मूल शिक्षा है। उन्होंने समाज के सभी सदस्यों से इस संकल्प को मजबूती से लागू करने की अपील की। लोहार समाज के इस प्रगतिशील कदम से अन्य समुदायों को भी प्रेरणा मिलने की उम्मीद है। यह पहल न केवल आर्थिक राहत देगी, बल्कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक मूल्यों को भी मजबूत करेगी।