अक्सर हम मच्छर को एक मामूली कीट समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन विज्ञान बताता है कि यह छोटा सा जीव बेहद जटिल और अद्भुत संरचना से बना होता है। जब मच्छर हमें काटता है, तो वह केवल खून नहीं चूसता, बल्कि हमारी त्वचा पर एक तरह की सूक्ष्म “सर्जरी” करता है, जिसका हमें तुरंत एहसास भी नहीं होता। वैज्ञानिकों के अनुसार, मच्छर की सूंड एक सुई नहीं बल्कि छह अलग-अलग नुकीले हिस्सों से बनी होती है। इनमें से दो सुइयां त्वचा में छेद करती हैं, दो त्वचा को हल्का सा अलग करती हैं, पांचवीं सुई खून की नस खोजकर खून चूसती है और छठी सुई त्वचा में लार छोड़ती है। यह लार उस स्थान को सुन्न कर देती है, जिससे दर्द देर से महसूस होता है।
इतनी छोटी सी मखलूक में इतना जटिल सिस्टम होना कुदरत की अद्भुत रचना को दर्शाता है। इसी संदर्भ में कुरान की सूरह अल-बकरा की आयत 26 में भी मच्छर का उदाहरण दिया गया है, जिसमें बताया गया है कि हमारे रब के लिए कोई भी चीज छोटी या बड़ी नहीं होती।
यह हमें सिखाता है कि कुदरत की हर रचना अपने आप में एक निशानी है। मच्छर जैसे छोटे जीव में भी इतनी परफेक्ट व्यवस्था देखकर इंसान को सोचने और सीखने का अवसर मिलता है। विज्ञान और आस्था दोनों मिलकर हमें कुदरत की महानता का एहसास कराते हैं।
