न्यूयॉर्क-मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अभूतपूर्व संकट पैदा हो गया है। इसी बीच रूस ने भारत को कच्चे तेल की आपूर्ति बढ़ाने की पेशकश की है, जो दक्षिण एशियाई देश के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है।

रूस का प्रस्ताव और भारत की चिंता

सूत्रों के अनुसार, रूस के पास भारतीय जल क्षेत्र के पास लगभग 9.5 मिलियन बैरल कच्चा तेल जहाजों में मौजूद है। यह तेल कुछ ही हफ्तों में भारतीय रिफाइनरियों तक पहुंच सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। भारत अपनी कुल तेल जरूरत का 40 प्रतिशत होर्मुज स्ट्रेट के माध्यम से आयात करता है, जहां वर्तमान में तनाव काफी बढ़ा हुआ है। भारतीय रिफाइनरियों की दैनिक प्रसंस्करण क्षमता 5.6 मिलियन बैरल है, जबकि देश के पास केवल 25 दिनों की आपूर्ति का भंडार ही मौजूद है। ऐसे परिस्थितियों में रूस से अतिरिक्त आपूर्ति राहत साबित हो सकती है।

होर्मुज स्ट्रेट में विस्फोटक स्थिति

मध्य पूर्वी संकट की सबसे चिंताजनक स्थिति होर्मुज स्ट्रेट में देखी जा रही है। ईरान ने घोषणा की है कि वह केवल चीनी जहाजों को ही इस रणनीतिक जलमार्ग से गुजरने की अनुमति देगा। इस कदम से स्थिति गंभीर हो गई है। विश्व के लगभग 20 प्रतिशत तेल इसी मार्ग से होकर जाता है। वर्तमान में 706 विदेशी तेल टैंकर होर्मुज स्ट्रेट के दोनों ओर इंतजार कर रहे हैं। 1 मार्च को केवल 3 टैंकर ही 2.8 मिलियन बैरल तेल लेकर गुजर पाए, जो सामान्य से 86 प्रतिशत कम है। ईरान की सेना और इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड्स ने अन्य जहाजों को निशाना बनाने की चेतावनी दी है।

अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप और समाधान

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि जरूरत पड़ने पर अमेरिकी नौसेना तेल टैंकरों की सुरक्षा के लिए तैनात की जा सकती है। इसी बीच चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने युद्ध को रोकने और समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संकट बरकरार रहा, तो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला, ऊर्जा बाजार और अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ेगा। इस समय अंतरराष्ट्रीय समुदार को तत्काल कूटनीतिक समाधान की आवश्यकता है। ईस्ट में युद्ध के बीच ईरान द्वारा रास्ता बंद करने से हालात बिगड़े हैं।