आजकल मोबाइल एप पर मिलने वाले फ्री ट्रायल और सिर्फ 1 रुपये में सब्सक्रिप्शन के ऑफर कई लोगों के लिए परेशानी का कारण बनते जा रहे हैं। लोग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे Facebook, Instagram और YouTube पर दिखने वाले विज्ञापनों से प्रभावित होकर बिना शर्तें पढ़े “मैं सहमत हूँ” पर क्लिक कर देते हैं। इसके बाद उन्हें पता भी नहीं चलता और हर महीने उनके बैंक खाते से स्वतः पैसे कटने लगते हैं। अक्सर लोग सोचते हैं कि एप हटाने से समस्या खत्म हो जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं होता। असल में सदस्यता Google Play, बैंक या भुगतान प्लेटफॉर्म के स्तर पर सक्रिय रहती है। जब पीड़ित बैंक से संपर्क करते हैं तो इसे अधिकृत लेनदेन बताकर जिम्मेदारी से बच लिया जाता है। कई मामलों में साइबर थाने में भी इसे तकनीकी त्रुटि मानकर गंभीरता से नहीं लिया जाता।

पढ़े-लिखे लोग भी लालच में आकर इस जाल में फंस जाते हैं

विशेषज्ञों के अनुसार, पढ़े-लिखे लोग भी जल्दबाजी और लालच में आकर इस जाल में फंस जाते हैं। कंपनियां फ्री ट्रायल के नाम पर यूपीआई ऑटो-पे, नाच (राष्ट्रीय स्वचालित समाशोधन), ई-मैंडेट या कार्ड से आवर्ती भुगतान चालू कर देती हैं। इसके बाद बिना किसी अलग सूचना के हर महीने राशि कटती रहती है। अगर आपके खाते से बिना जानकारी पैसे कट रहे हैं, तो सबसे पहले बैंक विवरण देखें कि कटौती किस माध्यम से हो रही है। यूपीआई एप जैसे PhonePe और Paytm में जाकर ऑटो-पे और सदस्यता अनुभाग जांचें। संबंधित स्क्रीनशॉट सुरक्षित रखें।

संबंधित एप में जाकर सदस्यता रद्द करें

यदि भुगतान डेबिट या क्रेडिट कार्ड से हो रहा है, तो संबंधित एप में जाकर सदस्यता रद्द करें। नेट बैंकिंग में स्थायी निर्देश और आवर्ती भुगतान बंद करवाएं। जरूरत पड़ने पर कार्ड पर अंतरराष्ट्रीय या स्वतः-डेबिट सुविधा अस्थायी रूप से रोकें। ठगी या धोखाधड़ी का संदेह होने पर तुरंत 1930 राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन पर कॉल करें और ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें। अगर फिर भी कटौती न रुके, तो कार्ड अवरुद्ध कर नया कार्ड जारी करवाना बेहतर विकल्प है। सावधानी और जागरूकता ही ऐसे सदस्यता जाल से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है।

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