एफआर न्यूज. जयपुर | हरमाड़ा थाना क्षेत्र की लोहा मंडी रोड पर सोमवार दोपहर को भयावह सड़क हादसा हो गया। ब्रेक फेल होने के चलते अनियंत्रित डंपर ने पहले एक कार को जोरदार टक्कर मारी, फिर पलटकर तीन अन्य गाड़ियों और 15-20 बाइक सवारों पर जा गिरा। हादसे में 14 लोगों की मौके पर मौत हो गई, जबकि 12 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। राजस्थान की सड़कों पर सितंबर और अक्टूबर के दो महीनों में सड़क हादसों की संख्या और उससे होने वाली मौतों में चिंताजनक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सितंबर में जहां 790 हादसों में 354 लोगों की जान गई। वहीं, अक्टूबर में यह आंकड़ा बढ़कर 764 हादसों और 436 मौतों तक पहुंच गया। दौसा, नागौर, बाड़मेर, डूंगरपुर और श्रीगंगानगर जिलों में सबसे अधिक दुर्घटनाएं और मौतें दर्ज की गईं। जयपुर में अक्टूबर में छह हादसे हुए, जिसमें आठ लोगों की मौत हो गई। शुरुआत जयपुर के सवाई मान सिंह (एसएमएस) अस्पताल से हुई, जहां 6 अक्टूबर की रात ट्रॉमा सेंटर की दूसरी मंजिल पर आईसीयू वार्ड में शॉर्ट सर्किट से आग लग गई. इस हादसे में 8 मरीजों की मौत हो गई और कई गंभीर रूप से झुलस गए. आग लगते ही अस्पताल में अफरा-तफरी मच गई. रातभर दमकलकर्मियों ने आग पर काबू पाया, लेकिन लोगों की जान नहीं बच सकी।
एआई मॉनिटरिंग और अल्कोहल टेस्ट अनिवार्य करना जरूरी
अब वक्त है एआई ट्रैफिक मॉनिटरिंग सिस्टम का। दिल्ली, हैदराबाद और चेन्नई में एआई कैमरे पहले से स्पीड, लेन बदलने और नशे में ड्राइविंग की रीयल-टाइम निगरानी कर रहे हैं। इन्हें अगर देशभर के हाईवे पर लागू किया जाए, तो हादसों में भारी कमी आ सकती है। ड्राइवर मॉनिटरिंग सिस्टम भी कारगर कदम है। यह सेंसर के ज़रिए ड्राइवर की थकान या नशे के लक्षण पहचानकर अलर्ट भेजता है। टाटा ट्रकों में ये तकनीक लागू हो चुकी है, और 2026 से मंत्रालय इसे सभी बड़े वाहनों में अनिवार्य करने की तैयारी में है। अब बात अल्कोहल इंटरलॉक डिवाइस की — जहां वाहन तभी स्टार्ट होगा, जब ड्राइवर ब्रेथ एनालाइज़र टेस्ट में पास हो। ये सिस्टम स्वीडन, फिनलैंड और ऑस्ट्रेलिया में पहले से लागू है। भारत में भी इसे ट्रक और बसों में जरूरी बनाया जाना चाहिए। साथ ही, रैंडम अल्कोहल टेस्ट हर टोल प्लाजा पर अनिवार्य किए जाएं। नियम तोड़ने वालों के लाइसेंस सस्पेंड हों और कंपनियों पर जुर्माना लगे। और अंत में, जीरो टॉलरेंस ज़ोन—जैसे गुजरात और महाराष्ट्र में—जहां नशे में ड्राइविंग, ओवरस्पीडिंग या ओवरलोडिंग पर तुरंत चालान होता है। तकनीक और सख्ती—दोनों साथ आएं, तभी हादसे रुकेंगे और सड़कें होंगी सुरक्षित।
