एमटीएम ग्रुप ऑफ स्कूल्स में इस्लामिक साइंस एग्जीबिशन में इस्लाम व विज्ञान का दिखा अद्भुत संगम

एफआर न्यूज. जयपुर | एमटीएम ग्रुप ऑफ स्कूल्स द्वारा आयोजित “साइंस एंड इस्लामिक एग्जीबिशन” में विज्ञान और इस्लाम की शिक्षाओं का अद्भुत संगम देखने को मिला। सफर-ए-मेराज, बिग बैंग थ्योरी और किस्सा-ए-यूनुस (सुभाष चौक ब्रांच), जबकि गोल्डन एज ऑफ इस्लाम, एंब्रायोलॉजी और सेवन स्लीपर्स (रामगढ़ मोड ब्रांच) से चयनित हुए। सबसे उत्कृष्ट प्रोजेक्ट रहे। वही गजा एक्ट ने सभी को भावुक किया। एमटीएम प्रबंधन ने इसे “ज्ञान, आस्था और इंसानियत का संगम” बताया। एमटीएम ग्रुप के प्रिंसिपल ने बताया कि यह आयोजन करने का हमारा मकसद इस्लाम की पहचान करवाना बच्चो और लोगो में प्रोजेक्ट के माध्यम से इस्लामिक मालूमात को बढ़ाना और साइंस और क़ुरान के मॉडल के माध्यम से लोगो को समझाना मुस्लिम ने इस दुनिया को कितना कुछ दिया है इसके बारे में बताना मकसद था l इस एग्जीबिशन की वजह से 7 दिनों की लगातार मेहनत से बच्चे इस्लामिक ज्ञान और साइंस के खजाने से जुड़े। अभिभावकों ने इसे सराहते हुए कहा कि ऐसे प्रोग्राम बच्चों में ईमान का जज्बा जगाते हैं। परवरदिगार सबको इल्म और अमल की तौफीक अता फरमाए। इस लेख में बच्चों की इन्हीं कुछ प्रोजेक्ट को संक्षिप्त बताने जा रहे हैं।

1. सफर-ए-मेराज: आसमानों की अद्भुत यात्रा

सफर-ए-मेराज इस्लाम धर्म का सबसे अद्भुत चमत्कारी वाकया है, जिसमें पैगंबर मोहम्मद (स.अ.व.) को एक ही रात में मक्का से यरूशलेम और फिर वहाँ से सात आसमानों का सफर कराया गया। इस दिव्य यात्रा में उन्हें परवरदिगार के करीब बुलाया गया और पाँच वक्त की नमाज का आदेश मिला। इस प्रोजेक्ट में बच्चों ने बुर्राक (दिव्य सवारी), मस्जिद-अल-अक्सा और आसमानी सफर को मॉडल के माध्यम से प्रस्तुत किया। यह घटना मुसलमानों के लिए विश्वास, इबादत और परवरदिगार की असीम शक्ति का प्रतीक मानी जाती है। बच्चों ने इसे बेहद भावुक तरीके से प्रस्तुत किया।

2. बिग बैंग थ्योरी: कुरान और विज्ञान का मेल

बिग बैंग थ्योरी एक वैज्ञानिक सिद्धांत है जिसके अनुसार ब्रह्मांड की उत्पत्ति लगभग 13.8 अरब वर्ष पूर्व एक अत्यंत सघन और गर्म बिंदु से हुई थी। इस विस्फोट के बाद ब्रह्मांड का लगातार विस्तार हो रहा है। दिलचस्प बात यह है कि कुरान की आयत “और हमने आकाश को अपनी शक्ति से बनाया और हम इसका विस्तार कर रहे हैं” (सूरह ज़ारियात 51:47) इस वैज्ञानिक सिद्धांत से मेल खाती है। बच्चों ने मॉडल के माध्यम से यह दिखाया कि कैसे 1400 साल पहले कुरान में इस सच्चाई का उल्लेख किया गया था।

3. किस्सा यूनूस (अ.स.): सब्र और तौबा की मिसाल

इस्लामी इतिहास में पैगंबर यूनूस (अ.स.) की कहानी अत्यंत प्रेरक है। जब उनकी कौम ने परवरदिगार के संदेश को नकारा, तो वे निराश होकर शहर छोड़ गए और समुद्र में एक नाव पर सवार हो गए। तूफान आने पर उन्हें समुद्र में फेंक दिया गया और एक विशाल मछली ने उन्हें निगल लिया। अंधेरे पेट में तीन दिन तक रहते हुए उन्होंने दिल से तौबा की “और एक खास दुआ की” परवरदिगार ने उनकी दुआ सुनी और मछली ने उन्हें तट पर छोड़ दिया। यह कहानी सब्र, तौबा और परवरदिगार की रहमत का संदेश देती है।

4. गोल्डन एज ऑफ इस्लाम: ज्ञान का स्वर्णिम युग

आठवीं से तेरहवीं सदी का समय इस्लाम का स्वर्ण युग कहलाता है, जब मुस्लिम विद्वानों ने विज्ञान, गणित, चिकित्सा, खगोल विज्ञान, रसायन शास्त्र और दर्शन में अद्वितीय योगदान दिया। बगदाद का ‘बैत-अल-हिक्मा’ (हाउस ऑफ विजडम) विश्व का सबसे बड़ा शोध केंद्र था। इब्न सिना (चिकित्सा), अल-ख्वारिज्मी (गणित में एल्गोरिथम के जनक), इब्न अल-हैथम (प्रकाशिकी के पिता) जैसे महान वैज्ञानिकों ने मानवता को दिशा दी। बच्चों ने इन वैज्ञानिकों के आविष्कारों को मॉडल द्वारा प्रस्तुत किया और बताया कि आज की आधुनिक विज्ञान की नींव इस्लामिक स्वर्ण युग में रखी गई थी।

5. एंब्रायोलॉजी: कुरान में भ्रूण विकास का वर्णन

भ्रूणविज्ञान (Embryology) मानव जीवन के प्रारंभिक विकास का अध्ययन है। आश्चर्यजनक रूप से, कुरान में 1400 साल पहले ही भ्रूण के विकास की चरणबद्ध प्रक्रिया का सटीक वर्णन मिलता है। सूरह मोमिनून (23:12-14) में कहा गया है कि मनुष्य को मिट्टी के सार से बनाया गया, फिर नुत्फा (शुक्राणु), फिर अलक़ (जमा हुआ रक्त), फिर मुज़्गा (मांस का लोथड़ा), फिर हड्डियां और उन पर मांस चढ़ाया गया। आधुनिक भ्रूणविज्ञान इन चरणों की पुष्टि करता है। बच्चों ने मॉडल के माध्यम से दिखाया कि कैसे कुरान की आयतें वैज्ञानिक खोजों से मेल खाती हैं।

6. अशाब-ए-कहफ: सात सोए हुए युवकों की कहानी**

अशाब-ए-कहफ (Seven Sleepers) की कहानी कुरान की सूरह कहफ में वर्णित है। रोमन साम्राज्य में कुछ युवा एकेश्वरवाद (तौहीद) में विश्वास रखते थे। जब अत्याचारी शासक ने उन्हें मूर्ति पूजा के लिए मजबूर किया, तो वे एक गुफा में छिप गए। परवरदिगार ने उन्हें 309 वर्षों तक सुला दिया। जागने के बाद उन्हें पता चला कि उनकी कौम अब मोमिन बन चुकी है। यह कहानी परवरदिगार की ताकत, धैर्य और विश्वास का संदेश देती है। बच्चों ने गुफा का मॉडल बनाकर और कुत्ते (जो उनके साथ था) को दिखाकर इस कहानी को जीवंत किया।

7. गाजा संकट: मानवता की पुकार

गाजा क्राइसिस फिलिस्तीन-इजरायल संघर्ष का दर्दनाक चेहरा है। हाल के वर्षों में गाजा पट्टी पर हुए हमलों में हजारों मासूम बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग शहीद हुए हैं। घरों, अस्पतालों और स्कूलों को तबाह कर दिया गया। इस प्रोजेक्ट में बच्चों ने गाजा की तबाही, विस्थापित परिवारों की पीड़ा और मानवता की गुहार को प्रस्तुत किया। यह प्रदर्शनी देखकर सभी दर्शक भावुक हो गए। बच्चों ने संदेश दिया कि हमें गाजा के मासूमों के लिए दुआ करनी चाहिए और मानवता के लिए आवाज उठानी चाहिए। यह प्रोजेक्ट सबसे मार्मिक और प्रभावशाली रहा।
(एफआर न्यूज ब्यूरो)