फतेहपुर शेखावाटी। “फाउंडेशन हमारी रूह है, जिस तरह शरीर बिना रूह के बेकार है, वैसे ही हमारा जीवन बिना फाउंडेशन के अधूरा था।” यह कहना है शदाशिव का, जिनकी जिंदगी डीएचपी फाउंडेशन ने पूरी तरह बदल दी। बिहार से फतेहपुर शेखावाटी आए शदाशिव आदर्श विद्या मंदिर में पढ़ते थे। उनके पिता सामाजिक विकास और अणुव्रत आंदोलन में सक्रिय थे, लेकिन घर की आर्थिक स्थिति अत्यंत कमजोर थी। दसवीं में 89.9% अंक लाने के बाद इंजीनियरिंग करने का सपना था, परंतु आर्थिक तंगी रास्ते में बाधा बनी हुई थी।
कई मुस्लिम छात्रों को भी मुफ्त में इंजीनियरिंग की पढ़ाई करवाई
ऐसे कठिन समय में डीएचपी फाउंडेशन ने उन्हें आर्थिक सहयोग प्रदान किया। आज शदाशिव न केवल इंजीनियर बनकर अच्छे पद पर कार्यरत हैं, बल्कि उन्होंने कई मुस्लिम छात्रों को भी मुफ्त में इंजीनियरिंग की पढ़ाई करवाई। उनकी बहन ने भी बीटेक किया और आज जयपुर में कंप्यूटर सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में कार्यरत हैं। शदाशिव ने दाउद हनीफ पिनारा, महासचिव श्रीराम थालौङ और संतोष थालैङ का विशेष आभार व्यक्त करते हुए कहा, “फाउंडेशन ने न केवल उनका बल्कि अनेक उपेक्षित और आर्थिक रूप से पिछड़े बच्चों का भविष्य संवारा है। “हम जितना भी लिखें या कहें, वह कम ही होगा।”
