शरफुद्दीन बैग. जयपुर |
दुनिया और आख़िरत में हमारा सबसे बड़ा इम्तिहान हमारे अखलाक का है। क़यामत के दिन भी सबसे पहले हमारे अखलाक का ही हिसाब होगा। इस्लाम में अच्छे अखलाक और चरित्र को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। अगर हमारे अखलाक पड़ोसियों के, अपनों के, परायों के और तमाम इंसानों के साथ अच्छे नहीं हैं तो हमारी नमाज़ें, रोज़े, हज, उमरे और तमाम इबादतें सब बेकार चली जाएंगी। हमारी बदअखलाकी की वजह से न सिर्फ दुनिया में ज़लील-ओ-रुसवा होंगे बल्कि आख़िरत में भी नेकियों से हमारा दामन खाली हो जाएगा।
पड़ोसियों के साथ बुरे व्यवहार की सज़ा
एक बार रसूल हज़रत मुहम्मद(स.अ.व) से पूछा गया कि, “या रसूल! एक औरत बड़ी इबादतगुज़ार है, तहज्जुद गुज़ार है, नफ़िल पे नफ़िल पढ़ती जाती है। मगर हमसायों यानी पड़ोसियों के साथ उसके अखलाक और व्यवहार अच्छे नहीं हैं। पड़ोसी उसके अखलाक से परेशान हैं, तो उसके बारे में क्या फ़रमाते हैं?” आपने साफ़ शब्दों में फ़रमाया: “वह जहन्नुम में जाएगी।” यह हदीस हमें बताती है कि इबादत के साथ-साथ अच्छे अखलाक कितने ज़रूरी हैं। बिना अच्छे व्यवहार के इबादतें बेमानी हैं।
पड़ोसी कौन है?
खुदा के वास्ते अपना एहतिसाब कीजिए। अपने पड़ोसियों के साथ शफ़क़त, मोहब्बत, ख़ैरख़्वाही, हमदर्दी, रवादारी और खुशअख़लाक़ी का सुलूक कीजिए।
क़ुरान के मुताबिक़ पड़ोसी सिर्फ़ वह नहीं जो आपके घर के बगल में रहता है। बल्कि:
– रिश्तेदार पड़ोसी हो
– दूर का ग़ैर रिश्तेदार पड़ोसी हो
– आपके साथ काम करने वाला हो
– सफ़र करने वाला साथी हो
– साथ बैठने वाला पड़ोसी हो
किसी भी मज़हब, जात या हैसियत का हो, वह आपका पड़ोसी है और उसके साथ अच्छे व्यवहार की ज़िम्मेदारी आप पर है।
नबी करीम का उसवा-ए-हसना
आप मुहम्मद (स.अ.व) मक्का में नबी बनने से पहले 40 साल तक अपने अखलाक और किरदार का मुज़ाहिरा करते रहे थे। नमाज़, रोज़ा, हज वग़ैरा तो नबुव्वत के बाद फ़र्ज़ किए गए। दीन में असल मक़सूद अखलाक की पाकीज़गी ही है। दीन का सही तसव्वुर, सही फ़हम यानी समझ को समझना और समझाना भी वक़्त की बड़ी ज़रूरत है। “I love Mohammad” का तक़ाज़ा और फ़रीज़ा भी यही है।
अखलाक – पैग़म्बर की आमद का मक़सद
ख़ुद आप मुहम्मद(स.अ.व) ने अपने आने का मक़सद भी यही बताया कि: “मैं दुनिया में इंसानी अखलाक को उसके आला से आला दर्जे तक पूरा करने के लिए भेजा गया हूं।” जी हां, आप मुहम्मद (स.अ.व) ने इंसानी अखलाक का वो नमूना पेश किया जो रहती दुनिया तक सार्वभौमिक रूप से सर्वोत्तम रहेगा। 1500 साल से दुनिया आपके इस आला अखलाक की क़ायल है। और कुछ नहीं, इसी अखलाक का नतीजा था कि 1000-1200 साल तक इसी अख़लाक़ी ताक़त के नतीजे में उम्मत-ए-रसूल दुनिया में हुकूमत करती रही और इंसानों को फ़ैज़ पहुंचाती रही। वे बोझ नहीं बल्कि संपत्ति बनी रहीं।
दुनिया में इज़्ज़त और कामरानी की कुंजी अखलाक़
दुनिया में इज़्ज़त और कामरानी की कुंजी अखलाक़ ही है। और आख़िरत में असल इम्तिहान भी अखलाक का है। और अखलाक का पहला मैदान आपका पड़ोस है। इसका बेहतरीन नमूना आप मुहम्मद (स.अ.व) का उसवा-ए-हसना है। परवरदिगार हमको पड़ोस को जन्नत जैसा बनाने के लिए तमाम तर कोशिश करने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए, ताकि मौजूदा फ़ितनों से निजात मिल सके और ख़ुदा के हुज़ूर सुर्ख़रू हो सकें। आमीन
