बांग्लादेश में जारी हिंसा और अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों को लेकर एआईएमआईएम प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने गंभीर चिंता जताई है। रविवार (28 दिसंबर) को उन्होंने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की और भारत–बांग्लादेश संबंधों को मजबूत बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया। ओवैसी ने कहा कि उनकी पार्टी बांग्लादेश में दीपू चंद्र दास और अमृत मंडल की हत्या की सख्त निंदा करती है। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं के बाद जो कुछ भी हो रहा है, वह बांग्लादेश के अपने संवैधानिक जनादेश के खिलाफ है। साथ ही, उन्होंने भारत सरकार द्वारा बांग्लादेश के साथ रिश्ते मजबूत करने के लिए उठाए जा रहे कदमों का समर्थन भी किया।
एआईएमआईएम प्रमुख ने कहा कि बांग्लादेश की स्थापना धर्मनिरपेक्ष बांग्ला राष्ट्रवाद के आधार पर हुई थी और वहां करीब दो करोड़ अल्पसंख्यक रहते हैं, जो मुसलमान नहीं हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत और बांग्लादेश के बीच तनाव नहीं बढ़ेगा और बांग्लादेश की अंतरिम सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि वहां रहने वाले सभी अल्पसंख्यकों की सुरक्षा हो।

फरवरी में प्रस्तावित चुनावों के बाद दोनों देशों के रिश्ते और बेहतर होंगे?

ओवैसी ने सुरक्षा के लिहाज से भी बांग्लादेश की स्थिरता को भारत के लिए अहम बताया, खासकर पूर्वोत्तर राज्यों के संदर्भ में। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में हाल ही में एक लोकप्रिय क्रांति हुई है और फरवरी में प्रस्तावित चुनावों के बाद दोनों देशों के रिश्ते और बेहतर होंगे। हालांकि, उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि आईएसआई, चीन और भारत की दुश्मन मानी जाने वाली अन्य ताकतें अब बांग्लादेश में सक्रिय हैं, जो चिंता का विषय है। इसके साथ ही ओवैसी ने यह भी कहा कि बांग्लादेश की घटनाओं की निंदा करते समय हमें अपने देश में हो रही हिंसक घटनाओं को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। उन्होंने ओडिशा के संबलपुर में एक प्रवासी मजदूर की हत्या और उत्तराखंड में पढ़ाई कर रहे आदिवासी छात्र एंजेल चकमा की मौत का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं भी उतनी ही गंभीर हैं। ओवैसी के बयान ने एक बार फिर क्षेत्रीय स्थिरता, अल्पसंख्यक सुरक्षा और आंतरिक–बाहरी सुरक्षा चुनौतियों पर बहस तेज कर दी है।