मक्का (सऊदी अरब) — नहर-ए-ज़ुबैदा (Ain Zubaydah) अरब इतिहास की एक महान इंजीनियरिंग का उदाहरण और मानवीय सेवा की मिसाल है। यह प्राचीन नहर अब्बासी साम्राज्य की रानी ज़ुबैदा बिंत जाफ़र ने 8वीं-9वीं सदी में बनवाई थी, जब मक्का और हज मार्ग पर पानी की भारी कमी थी। रानी ज़ुबैदा, जो हारून अल-रशीद की पत्नी एवं अब्बासी राजघराने की राजकुमारी थीं, ने हाजियों और मक्का के निवासियों के लिए स्थायी जल आपूर्ति सुनिश्चित करने का संकल्प लिया। उन्होंने हुनैन और नुमान घाटियों से पानी मक्का, अराफात, मुज़दलिफ़ा और मीना तक पहुँचाने के लिए लगभग 30-37 किलोमीटर लंबी नहर का निर्माण कराया। सड़क, नहर और भूमिगत चीन्नलों का उपयोग करते हुए यह प्रणाली गुरुत्वाकर्षण पर आधारित थी, जिससे पानी बिना पंप के आगे बढ़ता था।
निर्माण काल में कठिन रेगिस्तान, ऊबड़-खाबड़ पहाड़ और गर्म मौसम जैसी चुनौतियाँ थीं। इतिहासकार बताते हैं कि रानी ज़ुबैदा ने इस कार्य को पूरा कराने के लिए विशाल धन खर्च किया और कहा था कि “हर कुदाल के प्रहार पर एक दीनार भी खर्च करो।”
यह नहर लगभग 1200 वर्षों तक हाजियों और नगरवासियों को पानी उपलब्ध कराती रही और आधुनिक पाइपलाइन प्रणालियों के आगमन तक मुख्य जल स्रोत बनी रही। आज इसके अवशेष मक्का, अराफात और मीना के आसपास देखे जा सकते हैं और यह इस्लामी युगीन सहानुभूति, परोपकार और तकनीकी कौशल का एक स्मारक है।