आज के दौर में मार्केटिंग का सामान्य नियम यह बन गया है कि किसी भी प्रोडक्ट या सर्विस की कमियों को छुपाया जाए, बड़े-बड़े वादे किए जाएं और ग्राहक को आकर्षक बातों से लुभाया जाए। लेकिन इतिहास हमें एक बिल्कुल अलग और असरदार उदाहरण देता है, जो यह साबित करता है कि सच्चाई कभी नुकसान नहीं करती, बल्कि लंबे समय में सफलता की नींव बनती है। वक्ता एक उदाहरण देते हुए कहते हैं कि ज़रा कल्पना कीजिए, कोई व्यक्ति अपना सामान बेचते समय उसकी कमियां खुद ही बता दे और फिर भी अरबपति बन जाए। यह कोई कल्पना नहीं, बल्कि हकीकत है। हज़रत अब्दुर्रहमान बिन औफ (रज़ि.) जब व्यापार करते थे, तो अपने माल की खूबियों के साथ-साथ उसकी कमियां भी ईमानदारी से ग्राहकों को बता देते थे। वे यह नहीं सोचते थे कि सच बोलने से बिक्री कम हो जाएगी। इसके उलट, रब ने उनकी इस सच्चाई और ईमानदारी के कारण उनके कारोबार में बरकत अता फरमाई।
सच बोलने से उनका नुकसान नहीं हुआ, बल्कि लोगों का भरोसा और मज़बूत हुआ। और जब भरोसा बनता है, तो ग्राहक बार-बार वापस आता है। जब आप खुद अपने प्रोडक्ट की कमी बताते हैं, तो सामने वाला यह समझता है कि यह इंसान मेरे साथ ईमानदार है और मुझे धोखा नहीं देगा। यही भावना एक सामान्य ग्राहक को आजीवन ग्राहक में बदल देती है।
आज के समय में, चाहे आप फ्रीलांसर हों या किसी बिज़नेस के मालिक, यह उसूल आपके लिए भी उतना ही अहम है। अपने क्लाइंट से सच्चाई बोलिए, अपनी क्षमता और सीमाओं को साफ-साफ बताइए। खुद को जैसा हैं वैसा ही पेश कीजिए। जब आप ईमानदारी के साथ काम करेंगे, तो न सिर्फ इंसानों का भरोसा मिलेगा, बल्कि परवरदिगार भी आपके कारोबार में बरकत अता फरमाएंगे। सचाई ही असली मार्केटिंग है और भरोसा ही सबसे बड़ी पूंजी।