नई दिल्ली। लोकसभा स्पीकर का पद निष्पक्षता और लोकतांत्रिक संतुलन का प्रतीक माना जाता है। लेकिन जब स्पीकर की भूमिका पर सवाल उठते हैं, तो उन्हें हटाने की एक तय संवैधानिक प्रक्रिया मौजूद है। लोकसभा के पूर्व महासचिव पी.डी.टी. आचारी के अनुसार, स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव नहीं, बल्कि “रिजॉल्यूशन टू रिमूव स्पीकर” लाया जाता है। यह प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 94(e) और लोकसभा नियमों में दर्ज है। इस प्रक्रिया के तहत कोई भी सांसद लोकसभा के सेक्रेटरी जनरल को लिखित नोटिस दे सकता है। सामान्यतः दो सांसद मिलकर यह नोटिस देते हैं। नोटिस में स्पीकर के खिलाफ स्पष्ट, सटीक और ठोस आरोप दर्ज करना अनिवार्य है। यह प्रावधान संवैधानिक मर्यादा और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया है।
