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आई-पेक रेड मामला: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, 18 मार्च तक टली अगली तारीख

By Friday Sanwad
February 20, 2026 2 Min Read
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नई दिल्ली/कोलकाता। पश्चिम बंगाल में आई-पैक से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान केंद्र और राज्य सरकार आमने-सामने नजर आए। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने आरोप लगाया है कि 8 जनवरी 2026 को कोलकाता में आई-पैक के कार्यालय और उसके निदेशक प्रतीक जैन के ठिकानों पर छापेमारी के दौरान राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन ने उसकी कार्रवाई में बाधा डाली। वहीं पश्चिम बंगाल सरकार ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि केंद्रीय एजेंसी राजनीतिक दबाव बनाने के लिए कार्रवाई कर रही है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि जांच एजेंसियों के काम में दखल गंभीर विषय है और इसकी जांच आवश्यक है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि एजेंसियों को स्वतंत्र रूप से काम करने दिया जाना चाहिए, लेकिन कानून के दायरे में रहकर। कोर्ट ने फिलहाल मामले की अगली सुनवाई 18 मार्च तक के लिए स्थगित कर दी है। इससे पहले 3 फरवरी की तारीख भी टल चुकी है।

₹2,742 करोड़ के कथित मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा बताया जा रहा है मामला

यह मामला लगभग 2,742 करोड़ रुपये के कथित मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा बताया जा रहा है। सीबीआई ने इस प्रकरण में 27 नवंबर 2020 को प्राथमिकी दर्ज की थी, जिसके बाद ईडी ने 28 नवंबर 2020 से जांच शुरू की। आरोप है कि हवाला के जरिए लगभग 20 करोड़ रुपये आई-पैक तक पहुंचाए गए। 8 जनवरी को ईडी की टीम ने कोलकाता में छापेमारी की कार्रवाई की थी।

किसी भी जांच में बाधा नहीं डाल रहे: राज्य सरकार

इस दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी आई-पैक कार्यालय पहुंचीं और मीडिया से बातचीत की। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी शासित राज्यों में केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग किया जा रहा है। राज्य सरकार का कहना है कि वह किसी भी जांच में बाधा नहीं डाल रही, बल्कि संवैधानिक मर्यादाओं की रक्षा कर रही है। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट की एक पीठ पहले भी यह टिप्पणी कर चुकी है कि सरकार को ईडी के काम में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। वहीं पश्चिम बंगाल सरकार ने अदालत में कहा है कि संबंधित मामला पहले से कलकत्ता हाईकोर्ट में विचाराधीन है, इसलिए समानांतर कार्यवाही उचित नहीं है। मामले को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज है और सभी की नजरें अब 18 मार्च की सुनवाई पर टिकी हैं।

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