राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी (अल्पसंख्यक विभाग) ने 14 फरवरी को निवाई विधानसभा क्षेत्र के क़रेड़ा बुजुर्ग गांव पहुंचकर सर्वधर्म की जरूरतमंद महिलाओं को कंबल वितरित किए। यह कार्यक्रम कथित रूप से बीजेपी नेता द्वारा मुस्लिम महिलाओं से कंबल-वापसी विवाद के बाद आयोजित किया गया। इससे पहले चौमू प्रकरण में राजस्थान कांग्रेस ने जांच समिति गठित कर पीड़ितों को न्याय का आश्वासन दिया था। जांच दल का नेतृत्व कांग्रेस के अल्पसंख्यक विभाग के अध्यक्ष एम.डी. चोपदार ने स्वयं किया। “2014 के बाद अल्पसंख्यक मुद्दों पर कांग्रेस की सक्रियता पहले की तुलना में अधिक दिखाई दे रही है।” यहां तक कि नासिर-जुनैद मॉब लिंचिंग मामले में भी नहीं, “कांग्रेस की प्रतिक्रिया को लेकर मुस्लिम समाज के एक वर्ग में असंतोष की भावना देखी गई थी।” एआईएमआईएम सुप्रीमो असदुद्दीन ओवैसी ने इस मामले को देशभर के मुस्लिम समाज के सामने रखा था। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 15 अप्रैल तक पंचायत और निकायों के चुनाव कराने के आदेश दे रखे हैं। इसको लेकर एआईएमआईएम ने भी अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। प्रदेश अध्यक्ष जमील अहमद खान की अध्यक्षता में पार्टी की प्रदेश स्तर की बैठक हो चुकी है, जिसमें नगर निगम चुनावों की रणनीति और बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने पर चर्चा की गई।
राजस्थान में कांग्रेस का कोर वोट रहा है अल्पसंख्यक समाज
अल्पसंख्यकों में मुसलमान, सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध और पारसी समुदाय शामिल हैं। पारसी समुदाय को छोड़कर बाकी अन्य समुदाय की बड़ी आबादी राजस्थान में निवास करती है। प्रदेश की कुल जनसंख्या 2026 में आर्थिक समीक्षा 2025-26 के अनुसार 1 अक्टूबर 2025 तक लगभग 8.33 करोड़ अनुमानित है। यह आंकड़ा 2011 की जनगणना (6.85 करोड़) से 21.45% की वृद्धि दर्शाता है। इसमें अल्पसंख्यकों की हिस्सेदारी करीब 20% रहने की संभावना है। वही मुस्लिम समुदाय की आबादी 2026 में यह 14.5% के आसपास रहने का अनुमान है। मुस्लिम आबादी जयपुर, अजमेर, अलवर, भरतपुर, नागौर, कोटा, बाड़मेर, और जैसलमेर जैसे जिलों में सापेक्षिक रूप से अधिक है।
ओवैसी राजनीतिक विकल्प की करते हैं वकालत
बैरिस्टर असदुद्दीन ओवैसी राजस्थान में अपने संबोधनों में मुस्लिम समाज को राजनीतिक विकल्प देने की वकालत करते हैं। उनका कहना है कि मुसलमान केवल वोट देते हैं, लेकिन जाट, राजपूत और गुर्जर जैसे समुदायों की तरह वोट लेते नहीं। इन समुदायों ने अपनी राजनीतिक भागीदारी से अपनी कई समस्याएं हल की हैं। ओवैसी के अनुसार मुसलमानों को इन समुदायों से सीखकर अपना नेतृत्व बनाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र केवल वोट डालने तक सीमित नहीं है, बल्कि उसमें सक्रिय भागीदारी भी जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे राजस्थान को एक राजनीतिक विकल्प देना चाहते हैं, जहां बीजेपी और कांग्रेस बारी-बारी से सत्ता में आती रही हैं।
कांग्रेस के राष्ट्रीय नेताओं की चिंता
हाल ही में जयपुर में आयोजित पैगाम-ए-मोहब्बत सम्मेलन में ऑल इंडिया कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष इमरान प्रतापगढ़ी ने अल्पसंख्यकों से जुड़े मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि बीजेपी की राजनीति और बनाए जा रहे नैरेटिव को समझना और सतर्क रहना जरूरी है। अधिकारों के लिए संघर्ष आवश्यक है, लेकिन बाहरी चालों से बचना भी उतना ही अहम है। इस संबोधन में “हरे झंडे” का उल्लेख कर इमरान प्रतापगढ़ी का निशाना परोक्ष रूप से ओवैसी पर था। इसी क्रम में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का एक वीडियो भी वायरल हुआ, जिसमें वे सहारनपुर के सांसद इमरान मसूद से कहते नजर आए कि “हैदराबाद वाले को यूपी मत आने देना।” यह बयान साफ संकेत देता है कि कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को एआईएमआईएम के विस्तार की गहरी चिंता है।पार्टी को अपने परंपरागत अल्पसंख्यक वोट बैंक को बचाने के लिए सक्रिय होने की जरूरत भी है।
(कांग्रेस से आजादी के बाद राजस्थान से कितने नेता विधानसभा, लोकसभा और राज्यसभा पहुंचे — पढ़ें अगले अंक में)
