देश में क्रीम बिस्कुट के नाम पर एक बड़ा स्कैम चुपचाप चल रहा है, जिसका असर सीधे लोगों की सेहत पर पड़ रहा है। बाज़ार में मिलने वाले अधिकतर क्रीम बिस्कुटों के पैकेट पर ध्यान से पढ़ने पर पता चलता है कि उनमें “Cream” नहीं बल्कि “Creme” लिखा होता है। यह मामूली-सा स्पेलिंग अंतर असल में स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक सच को छिपाता है। विशेषज्ञों के अनुसार बिस्कुटों में इस्तेमाल होने वाला यह क्रेम दूध या डेयरी उत्पादों से नहीं बनता, बल्कि इसमें हाइड्रोजनेटेड ऑयल, रिफाइंड शुगर और आर्टिफिशियल फ्लेवर मिलाए जाते हैं। हाइड्रोजनेटेड ऑयल में पाया जाने वाला ट्रांस फैट एलडीएल यानी “बैड कोलेस्ट्रॉल” को बढ़ाता है। लंबे समय तक इसका सेवन आर्टरीज़ को सख्त और संकुचित करता है, जिससे हार्ट अटैक का ख़तरा बढ़ जाता है।

मेटाबॉलिक डिज़ीज़ की वजह

पोषण विशेषज्ञ बताते हैं कि हर बिस्कुट के साथ हम केवल कैलोरी ही नहीं, बल्कि इन्फ्लेमेशन, फैटी लिवर और इंसुलिन रेजिस्टेंस जैसी गंभीर समस्याओं को भी शरीर में जगह दे रहे हैं। धीरे-धीरे ये आदतें मेटाबॉलिक डिज़ीज़ की वजह बन जाती हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि यह रंग-बिरंगे और आकर्षक बिस्कुट बच्चों की पसंदीदा लिस्ट में सबसे ऊपर हैं। लेकिन बच्चों का लिवर और गट (आंत) अभी विकास की अवस्था में होता है, इसलिए ट्रांस फैट और कृत्रिम रसायनों से उन्हें सबसे बड़ा नुकसान होने की आशंका रहती है। Pediatric experts चेतावनी देते हैं कि नियमित रूप से क्रीम बिस्कुट खाने वाले बच्चों में मोटापा, पाचन समस्याएँ और शुगर का खतरा कई गुना बढ़ सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ माता-पिता से अपील कर रहे हैं कि बच्चों को क्रीम बिस्कुट देना तुरंत बंद करें और उनकी डाइट में फल, नैचुरल स्नैक्स और स्वास्थ्यवर्धक विकल्प शामिल करें। आज की यह छोटी जागरूकता, आने वाले समय में बच्चों की सेहत को बड़ी सुरक्षा दे सकती है।

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