लाखों लोगों के लिए आध्यात्मिक विकास का समय
दुनियाभर में लाखों लोग रमजान का पवित्र महीना मनाते हैं और सूर्योदय से सूर्यास्त तक लगातार 30 दिन तक व्रत रखते हैं। यह केवल एक आध्यात्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि इस दौरान मानव शरीर में एक विशाल जैविक परिवर्तन होता है। फोर्टिस गुड़गांव के मुख्य आहार विशेषज्ञ दीप्ति खटूजा के अनुसार, व्रत के इन 30 दिनों में शरीर एक अद्भुत यात्रा करता है।
पहला सप्ताह: सबसे कठिन दिन
शुरुआत में शरीर को सबसे ज्यादा परेशानी होती है क्योंकि वह नियमित भोजन के समय के अभ्यस्त है। जब अचानक भोजन बंद हो जाता है, तो शरीर घबरा जाता है और लीवर तथा मांसपेशियों में जमा शर्करा (ग्लाइकोजन) को तेजी से जलाने लगता है। इस अवधि में सिरदर्द, मस्तिष्क में धुंधलापन और थकान आम बातें हैं। यह शरीर के लिए एक समायोजन अवधि है।
दूसरा सप्ताह: नई ऊर्जा का आना
सातवें दिन के बाद शरीर में एक महत्वपूर्ण बदलाव आता है। रक्त में शर्करा की कमी के कारण शरीर अपने स्टोर किए गए फैट को जलाने लगता है। इस प्रक्रिया में केटोन्स नामक अणु बनते हैं जो मस्तिष्क के लिए ईंधन के रूप में काम करते हैं। इसी समय ‘फास्टिंग हाई’ की स्थिति आती है। भूख की तीव्र पीड़ा कम हो जाती है और शरीर की ऊर्जा पहले सप्ताह की तुलना में ज्यादा स्थिर हो जाती है।
तीसरा और चौथा सप्ताह: स्वास्थ्य में सुधार
तीसरे सप्ताह तक शरीर की स्वचालित सफाई प्रक्रिया (ऑटोफैजी) तेजी से होने लगती है। पाचन तंत्र व्यस्त न रहने के कारण शरीर की कोशिकाएं अपनी मरम्मत करने लगती हैं। रक्त शर्करा के प्रबंधन में सुधार होता है और रक्तचाप भी कम होने लगता है। महीने के अंत तक आप न केवल अपना वजन कम देखेंगे, बल्कि अधिक केंद्रित और हल्का महसूस करेंगे।
सफल व्रत के लिए विशेषज्ञ सलाह
व्रत को स्वस्थ रखने के लिए रातभर पानी का सेवन जारी रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है। इफ्तार (व्रत खोलते समय) तेल में तली खाद्य वस्तुओं और मिठाइयों से बचना चाहिए। साधारण भोजन, प्रोटीन और ताजी सब्जियां खाने से रक्त शर्करा स्थिर रहती है और शरीर को पूरा लाभ मिलता है। उचित विश्राम भी आवश्यक है क्योंकि नींद के बिना शरीर ठीक से ठीक नहीं हो सकता।

Categorized in: