सोनम वांगचुक-कॉकरोच से कांग्रेस की दूरी ?
नई दिल्ली
मशहूर पर्यावरणवादी सोनम वांगचुक, कॉकरोच जनता पार्टी और नेता विपक्ष राहुल गांधी नीट पेपर लीक और छात्रों के मुद्दों पर एकजैसा आंदोलन चला रहे हैं। दोनों का मंच अलग-अलग है। वांगचुक कॉकरोच जनता पार्टी के मंच पर आमरण अनशन कर रहे हैं। आज मंगलवार 14 जुलाई को उनके आमरण अनशन का 17वां दिन है और उनकी हालत वाकई खराब है। 14 जुलाई को सोशल मीडिया पर अचानक इस तरह की पोस्ट और ट्वीट की बाढ़ आ गई, जिसमें यह मांग या सलाह दी जा रही थी कि नेता विपक्ष राहुल गांधी को जंतर मंतर पर जाकर सोनम वांगचुक का आमरण अनशन खत्म कराना चाहिए। दोनों का मुद्दा एकजैसा है।
14 जुलाई को ही कॉकरोच जनता पार्टी, प्रवक्ता सौरव दास और संस्थापक अभिजीत दिपके ने बताया कि पार्टी ने 9-10 जुलाई को नेता विपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस पार्टी, बीजेपी समेत तमाम राजनीतिक दलों को पत्र लिखकर अपील की कि वे जंतर मंतर आकर आंदोलन का समर्थन करें। सोनम वांगचुक का अनशन खत्म कराएं। राहुल या कांग्रेस ने 14 जुलाई को इस रिपोर्ट के लिखे जाने तक कोई जवाब नहीं दिया। सीजेपी का कहना है कि सोनम वांगचुक का आंदोलन शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा घोटालों और युवाओं के भविष्य से जुड़े सवाल उठा रहा है, इसलिए विपक्ष को खुलकर इसके साथ खड़ा होना चाहिए।
हम पहले से लड़ रहे हैं: कांग्रेस
सोशल मीडिया पर राहुल गांधी को लेकर हुए सवालों का जवाब राहुल के नज़दीक माने जाने वाले गुजरात प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष जिग्नेश मेवाणी ने दिया। जिग्नेश ने कहा कि कांग्रेस ने कभी भी सोनम वांगचुक या आंदोलनकारी युवाओं की आलोचना नहीं की। सोनम वांगचुक शिक्षा के क्षेत्र में अपने योगदान के लिए सम्मानित व्यक्ति हैं और उनका स्वास्थ्य सभी के लिए चिंता का विषय है। कांग्रेस उनके उद्देश्य, लद्दाख के अधिकारों और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग के साथ खड़ी है। लेकिन यह कहना गलत है कि कांग्रेस इस मुद्दे से दूर रही है। हम साफ करना चाहेंगे कि एनएसयूआई और भारतीय युवक कांग्रेस लंबे समय से पेपर लीक और परीक्षा घोटालों के खिलाफ देशभर में आंदोलन कर रही हैं। हरियाणा के कुरुक्षेत्र में सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने आंदोलन का नेतृत्व किया। मध्य प्रदेश में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी समेत कई नेताओं और कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज हुआ। राजस्थान सहित कई राज्यों में भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पुलिस कार्रवाई का सामना किया।
‘छात्रों की गूंज’ अभियान
जिग्नेश मेवाणी ने कहा कि राहुल गांधी ने ‘छात्रों की गूंज’ अभियान शुरू किया, जिसके तहत देश के 28 प्रमुख छात्र शहरों में युवाओं से संवाद, बैठकें और प्रदर्शन आयोजित किए गए। उनका दावा है कि यह अभियान परीक्षा प्रणाली में सुधार, रोजगार और शिक्षा संबंधी मुद्दों को लेकर चलाया जा रहा है। उन्होंने राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा, नीट प्रभावित छात्रों से मुलाकात, किसानों, हिंसा पीड़ित परिवारों और विभिन्न त्रासदियों से प्रभावित लोगों के बीच पहुंचने का भी उल्लेख किया और कहा कि कांग्रेस “दिखावे की राजनीति” नहीं बल्कि लगातार लोगों के साथ खड़े रहने में विश्वास करती है। मेवाणी ने कहा कि कांग्रेस सोनम वांगचुक के अनशन, एनएसयूआई और युवा कांग्रेस के आंदोलनों तथा युवाओं के सभी लोकतांत्रिक संघर्षों को एक-दूसरे का पूरक मानती है, न कि प्रतिस्पर्धी।
उत्तराखंड में 17 को रैली प्रस्तावित
कांग्रेस का कहना है कि पेपर लीक और नीट सहित शिक्षा संबंधी मुद्दों पर उसका अभियान जारी है। इसी क्रम में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी 17 जुलाई को देहरादून में ‘छात्र गूंज’ आंदोलन के तहत छात्रों की एक रैली को संबोधित करने वाले हैं। हालांकि, उत्तराखंड कांग्रेस का आरोप है कि प्रशासन ने अब तक इस रैली की अनुमति नहीं दी है। प्रदेश कांग्रेस नेताओं का कहना है कि वे लगातार पुलिस और प्रशासन से संपर्क कर रहे हैं, लेकिन अधिकारियों की ओर से अभी तक कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला है। प्रदेश कांग्रेस के नेताओं ने साफ कर दिया है कि राहुल गांधी की 17 जुलाई को राहुल ज़रूर होगी। कोई रोक नहीं सकता।
कॉकरोच जनता पार्टी को लेकर संदेह ?
सोनम वांगचुक ने कॉकरोच जनता पार्टी के मुद्दे का समर्थन किया और उनके मंच पर आमरण अनशन शुरू कर दिया। दूसरी तरफ सीजेपी को लेकर कांग्रेस समेत तमाम लोगों के दिमाग में कई सवाल हैं। उन सवालों के जवाब सीजेपी नहीं दे पा रही है। वरिष्ठ पत्रकार राजू पुरुलेकर जैसे बुद्धिजीवी इस मुद्दे पर लगातार सवाल उठा रहे हैं।
इससे पहले भी सोनम वांगचुक लद्दाख के मुद्दे पर भी आमरण अनशन कर चुके हैं। लेकिन सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके उनके साथ आमरण अनशन पर क्यों नहीं बैठे। क्या वांगचुक और दिपके इसे क्रमिक भूख हड़ताल में बदलकर आंदोलन को लंबा नहीं खींच सकते थे?