आपका फोन बन चुका है साइबर अपराधियों का सबसे बड़ा निशाना
61% यूजर के दस्तावेज, 38% की बैंक डिटेल्स फोन में; रोज हो रहे 1.3 लाख साइबर हमले
नई दिल्ली। स्मार्टफोन अब सिर्फ बात करने का जरिया नहीं, बल्कि जेब में रखा मिनी बैंक, डिजिटल लॉकर और ऑफिस बन चुका है। एक नए सर्वे के मुताबिक 61% भारतीय अपने फोन में निजी दस्तावेज, 48% ऑफिस ईमेल, 38% बैंकिंग डिटेल्स और 37% अब एआई चैट हिस्ट्री तक जमा रखते हैं। यही वजह है कि साइबर अपराधी अब स्मार्टफोन को ही सबसे बड़ा निशाना बना रहे हैं।साइबर सुरक्षा कंपनी कैस्परस्की के एशिया-पैसिफिक सर्वे के अनुसार 60% भारतीय अब इंटरनेट के लिए स्मार्टफोन को ही मुख्य डिवाइस मानते हैं। कंपनी के साउथ एशिया कंज्यूमर बिजनेस हेड पुरुषोत्तम भाटिया के मुताबिक, भारत में वर्ष 2025 में रोजाना औसतन 1.3 लाख से ज्यादा साइबर हमले दर्ज किए गए।फोन में क्या-क्या सेव हैसर्वे के अनुसार 61% यूजर पर्सनल डॉक्यूमेंट्स, 60% फोटो-वीडियो, 53% कॉन्टैक्ट्स, 42% नोट्स-रिमाइंडर और 27% यूजर मेडिकल रिकॉर्ड तक अपने फोन में सेव करके रखते हैं। इसके अलावा 48% लोग वर्क ईमेल फोन में सेव रखते हैं और 27% यूजर सीधे फोन से ही ऑफिस सिस्टम एक्सेस करते हैं।पैसों से जुड़ा खतरा सबसे बड़ासर्वे में सामने आया कि 38% यूजर के बैंकिंग डिटेल्स फोन में सेव हैं, जबकि 34% के पासवर्ड और लॉगिन जानकारी भी फोन में ही रखी है। चिंता की बात यह है कि ज्यादातर लोग इन्हें पासवर्ड मैनेजर जैसे किसी सुरक्षित तरीके से सेव नहीं करते, जिससे डेटा चोरी का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।एआई चैट बना नया खतरारिपोर्ट के मुताबिक 37% भारतीय अब अपने फोन में एआई चैट हिस्ट्री भी सेव रखते हैं, जो साइबर अपराधियों के लिए नया मौका बन गया है। जनवरी से मई 2026 के बीच दुनियाभर में 92,000 से ज्यादा मालवेयर हमले चैटजीपीटी, क्लॉड और जेमिनी जैसे नामों से बनाए गए फर्जी एआई ऐप्स के जरिए हुए। एक मामले में तो एआई ऐप की गड़बड़ी के चलते 2.5 करोड़ यूजर्स की करीब 30 करोड़ निजी बातचीत तक लीक हो गई।
इन तरीकों से करें बचाव
विशेषज्ञों के अनुसार जरूरी डेटा का अलग बैकअप रखें, पासवर्ड मैनेजर जैसे सुरक्षित टूल इस्तेमाल करें, फोन में लोकेशन ट्रैकिंग और ऑटो बैकअप ऑन रखें तथा स्क्रीन लॉक जरूर लगाकर रखें। इससे फोन चोरी या हैक होने की स्थिति में भी निजी जानकारी सुरक्षित रह सकती है।
डिजिटल अरेस्ट को अलग अपराध बनाने की तैयारी, जानें क्या बदलेगा कानून में
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर तैयार हो रहा नया मसौदा कानून, मौजूदा संसद सत्र में हो सकता है पेशनई दिल्ली। देशभर में तेजी से बढ़ रहे डिजिटल अरेस्ट के मामलों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इसे अलग अपराध बनाकर सख्त सजा तय करने का निर्देश दिया है। केंद्र ने कोर्ट को बताया कि डिजिटल अरेस्ट और डीपफेक से जुड़ा मसौदा कानून तैयार किया जा रहा है, जो मौजूदा संसद सत्र में पेश हो सकता है।
अलग अपराध बनाने की जरूरत क्यों?
अभी तक डिजिटल अरेस्ट की कोई तय कानूनी परिभाषा मौजूद नहीं है। बीते छह साल में साइबर ठगी से देश में करीब 52,976 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है, जिसमें से 4,238 करोड़ रुपये सिर्फ डिजिटल अरेस्ट के मामलों में ठगे गए हैं।नया कानून क्या बदल सकता हैप्रस्तावित कानून में अपराध की स्पष्ट परिभाषा, तय सजा और देशभर में एक समान कार्रवाई का आधार बनाया जाएगा। फर्जी कॉल करने वाले, नकली दस्तावेज बनाने वाले, डीपफेक तैयार करने वाले और इनसे जुड़े नेटवर्क पर संगठित अपराध की तरह कार्रवाई संभव हो सकेगी।सजा और जमानत को लेकर स्थितिसजा का मसौदा सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि कितनी सख्त सजा तय की जाएगी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट पहले ही हालिया मामलों में कह चुका है कि असाधारण आधार के बिना ऐसे मामलों में जमानत नहीं दी जानी चाहिए।
अभी किन धाराओं में होता है केस
फिलहाल इस तरह के मामलों में धोखाधड़ी, अधिकारी बनकर ठगी, धमकी देने और फर्जी दस्तावेज बनाने से जुड़ी बीएनएस की धाराएं लगाई जाती हैं। वहीं पहचान चुराकर कंप्यूटर के जरिए अधिकारी बनकर ठगी करने के मामलों में आईटी एक्ट की धारा 66सी और 66डी के तहत कार्रवाई होती है।डिजिटल अरेस्ट कॉल आने पर क्या करेंठग खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी या कोर्ट का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी का डर दिखाते हैं और पीड़ित को कैमरे के सामने बैठाकर रकम ट्रांसफर करवाते हैं। ऐसी कॉल आने पर तुरंत कॉल काटें, कोई रकम न भेजें और साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं। कॉल, चैट, फर्जी नोटिस और लेन-देन के सबूत सुरक्षित रखें। समय पर शिकायत दर्ज कराने से अब तक 11,158 करोड़ रुपये की रकम पीड़ितों को बचाई जा चुकी है।