एमबीबीएस में प्रवेश अब दिव्यांगता प्रतिशत से नहीं, पढ़ाई की क्षमता के आधार पर होगा एनएमसी की नई गाइडलाइन जारी; नीट काउंसलिंग में भी बड़े बदलाव
कोटा/नई दिल्ली। नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) ने एमबीबीएस में दिव्यांग अभ्यर्थियों के प्रवेश की गाइडलाइन बदल दी है। अब किसी अभ्यर्थी की पात्रता केवल दिव्यांगता श्रेणी या प्रतिशत से तय नहीं होगी, बल्कि यह देखा जाएगा कि वह सहयोग के साथ एमबीबीएस की पढ़ाई सफलतापूर्वक पूरी कर सकता है या नहीं। नई व्यवस्था में मेडिकल असेसमेंट बोर्ड अभ्यर्थी की कार्यक्षमता का व्यक्तिगत मूल्यांकन करेगा। मूल्यांकन में सहायक तकनीक, विशेष उपकरण, बाधारहित परिसर, संवाद संबंधी सहायता और मरीजों की सुरक्षा को ध्यान में रखा जाएगा। बोर्ड अभ्यर्थी को पात्र, उचित सुविधाओं के साथ पात्र या अपात्र घोषित कर सकेगा। नीट काउंसलिंग: सीट अपग्रेड के लिए फिजिकल रिपोर्टिंग जरूरी नहीं मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (एमसीसी) ने नीट-यूजी की काउंसलिंग को लेकर भी बदलाव किए हैं। अब सीट अलॉट होने के बाद छात्र को अपग्रेड करवाने के लिए फिजिकल रिपोर्टिंग की आवश्यकता नहीं होगी। पहले छात्र को सीट अपग्रेडेशन के लिए संबंधित संस्थान में जाना होता था और अगले राउंड में भाग लेने के दौरान उनका एडमिशन रद्द होने का खतरा बना रहता था। आर्थिक स्थिति और समय की कमी के कारण कई छात्र अलॉट संस्थान तक जाने का इंतजाम नहीं कर पाते थे। साथ ही, छात्रों के लिए अलॉट सीट छोड़ने की ऑनलाइन फेसेलिटी भी शुरू की गई है। 15% एआईक्यू काउंसलिंग में भी बदलाव ऑल इंडिया 15% कोटा एमबीबीएस-बीडीएस काउंसलिंग को अधिक पारदर्शी और विद्यार्थी हितैषी बनाने के लिए भी एमसीसी ने कई अहम बदलाव किए हैं। 29 जुलाई को स्वास्थ्य मंत्रालय की समीक्षा बैठक में सिंगल टाइम फिजिकल रिपोर्टिंग और ऑनलाइन डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन लागू करने का निर्णय लिया गया। जोसा काउंसलिंग की तर्ज पर अब अभ्यर्थियों को ‘फ्रीज’ और ‘फ्लोट’ विकल्प भी मिलेंगे। फ्रीज विकल्प चुनने वालों को आवंटित कॉलेज में जाकर दस्तावेज सत्यापन और प्रवेश प्रक्रिया पूरी करनी होगी। काउंसलिंग संबंधी सहायता के लिए 24×7 कॉल सेंटर और टोल फ्री नंबर 1800-102-7637 भी उपलब्ध रहेगा। एजुकेशन एक्सपर्ट देव शर्मा के अनुसार, री-नीट यूजी-2026 में 11.21 लाख अभ्यर्थी क्वालिफाई हुए हैं, जिनके बीच 450 सरकारी मेडिकल संस्थानों की 63,159 एमबीबीएस सीटों के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा होगी। आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को बड़ी राहत विशेषज्ञों का मानना है कि एनएमसी और एमसीसी के ये बदलाव लाखों अभ्यर्थियों के लिए राहत भरे साबित होंगे। दिव्यांग अभ्यर्थियों को अब सिर्फ प्रतिशत के आधार पर प्रवेश से वंचित नहीं किया जा सकेगा, वहीं सीट अपग्रेडेशन और दस्तावेज सत्यापन की नई ऑनलाइन व्यवस्था से दूर-दराज और आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को बड़ी राहत मिलेगी। संबंधित अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे एमसीसी की आधिकारिक वेबसाइट और काउंसलिंग शेड्यूल पर लगातार नजर बनाए रखें, ताकि किसी भी अपडेट या समयसीमा की जानकारी से न चूकें।