युवाओं की बात सुनना सबसे ताकतवर हथियार : सुप्रीम कोर्ट ने सीजेपी प्रदर्शन हिंसा मामले में की अहम टिप्पणी पुलिस और सरकार दोनों को संयम बरतने की सलाह
फ्राइडे संवाद. नई दिल्ली | सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन में हुई हिंसा को लेकर एक याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने कहा कि युवाओं की बात सुनना सबसे ताकतवर हथियार है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि अगर कुछ भटके हुए युवक पत्थरबाजी करते हैं, तब भी उन्हें समझाने और सलाह देने की जरूरत है और उन्हें काउंसलिंग मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर सरकार आक्रामक रवैया अपनाएगी तो हालात और बिगड़ सकते हैं और हिंसा बढ़ सकती है, इससे बचना चाहिए।
पुलिस संयम रखे, शांतिपूर्ण प्रदर्शन को बढ़ावा दे
सीजेआई ने कहा कि सबसे जरूरी बात शांतिपूर्ण प्रदर्शन को बढ़ावा देना है। अगर कोई घटना हो भी जाती है तो पुलिस को बहुत संयम से काम लेना चाहिए, ताकि हालात नियंत्रण से बाहर न जाएं और जहां भी ऐसी घटनाएं हों, वहां बहुत सावधानी से स्थिति संभालनी चाहिए। सीजेआई ने आगे कहा कि युवाओं को हिंसा की राह पर जाने से रोकने के लिए बहुत सोच-समझकर कदम उठाने होंगे। उनके अनुसार सबसे अच्छा तरीका है उन्हें समझाना और शांत करना, उनकी बात सुनना और यह समझना कि वे आखिर क्यों विरोध कर रहे हैं। अंत में सीजेआई ने कहा कि ऐसे मामलों से कैसे निपटना है, यह कानून लागू करने वाली एजेंसियों के विवेक पर छोड़ देना चाहिए, क्योंकि उन्हें ऐसी परिस्थितियों से निपटने का अनुभव अदालत से ज्यादा है।
रिटायर्ड एयरफोर्स अफसर की याचिका पर हुई सुनवाई
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहन की बेंच ने यह टिप्पणी रिटायर्ड एयरफोर्स अफसर मनीष कुमार सोलंकी की याचिका पर सुनवाई के दौरान की। याचिका में 20 जुलाई के ‘संसद चलो’ मार्च के आयोजकों यानी सीजेपी प्रतिनिधियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। कोर्ट ने इस याचिका को इसी मामले से जुड़ी दूसरी याचिका के साथ जोड़ दिया।