महिलाओं की भागीदारी से ही बनेगा विकसित राजस्थान: दीया कुमारी
फ्राइडे संवाद. जयपुर | सीआईआई-आईडब्ल्यूएन की ओर से बुधवार को एक होटल में राजस्थान एनुअल सेशन एवं 7वें वुमन लीडरशिप समिट 2026 का आयोजन किया गया, जिसकी थीम ‘आर्किटेक्ट्स ऑफ विकसित भारत : वुमन ड्राइविंग ग्रोथ कर्व’ रही। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी ने कहा कि महिलाओं को नेतृत्व, उद्यमिता और आर्थिक विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए सरकार और उद्योग जगत के बीच मजबूत साझेदारी जरूरी है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार महिलाओं के लिए लाडो प्रोत्साहन योजना, राजीविका, लखपति दीदी, इंदिरा महिला शक्ति उद्यम प्रोत्साहन योजना और वर्क फ्रॉम होम योजना जैसी पहल चला रही है, लेकिन महिला नेतृत्व को और मजबूत करने के लिए उद्योग जगत की सक्रिय भागीदारी भी उतनी ही आवश्यक है। दीया कुमारी ने कहा कि राजस्थान वर्ष 2030 तक 350 बिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, ऐसे में प्रदेश की आर्थिक विकास यात्रा में महिलाओं की भागीदारी को केंद्र में रखना जरूरी है।
उद्योग जगत की महिला नेतृत्वकर्ताओं ने रखे विचार
राजस्थान रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) की चेयरपर्सन वीनू गुप्ता ने कहा कि भारत की आबादी में महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 48 प्रतिशत है, जबकि लेबर फोर्स में उनकी भागीदारी केवल 41 प्रतिशत है, ऐसे में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी बेहद जरूरी है। कॉन्फेट्टी गिफ्ट्स की फाउंडर सौम्या काबरा ने कहा कि जब कोई व्यक्ति व्यवसाय शुरू करता है तो वह केवल व्यवसाय का निर्माण नहीं करता, बल्कि वह व्यवसाय भी उसे एक बेहतर व्यक्ति और प्रोफेशनल बनने में मदद करता है। जीए इन्फ्रा की क्रिएटिव डायरेक्टर एवं चल शूज की फाउंडर मालविका अग्रवाल ने कहा कि डिजाइन केवल किसी उत्पाद को आकर्षक बनाने तक सीमित नहीं, बल्कि इसका उद्देश्य लोगों के जीवन में स्थायी और सार्थक बदलाव लाना भी होना चाहिए। सीआईआई राजस्थान के वाइस चेयरमैन और सिक्योर मीटर्स लिमिटेड के ग्रुप सीईओ सुकेत सिंघल ने कहा कि महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए केवल उन्हें प्रेरित करना पर्याप्त नहीं, इसके लिए परिवारों को भी शिक्षित और जागरूक करना जरूरी है। कार्यक्रम में ‘आयरन लेडी ऑफ जयपुर’ रेनू सिंघी ने 50 वर्ष की उम्र के बाद जीवन में नई शुरुआत करने की प्रेरणादायक यात्रा साझा करते हुए कहा कि उम्र कभी भी किसी व्यक्ति की क्षमता और आकांक्षाओं की सीमा नहीं होनी चाहिए।