निकाय चुनाव से पहले आरक्षण की तस्वीर साफ, जयपुर में निकली लॉटरी कोटा नगर निगम में बनेंगी ओबीसी महिला मेयर, पार्षद चुनाव की खर्च सीमा भी बढ़ी
फ्राइडे संवाद. जयपुर | राजस्थान में शहरी निकाय चुनावों को लेकर लंबे समय से चल रही तैयारियों के बीच बुधवार को स्वायत्त शासन विभाग में प्रदेश के 309 शहरी निकायों में निकाय प्रमुख के पदों के आरक्षण की लॉटरी निकाली गई। इसके तहत 309 में से एससी वर्ग के लिए 50 (महिला 16), एसटी वर्ग के लिए 11 (महिला 3), ओबीसी वर्ग के लिए 60 (महिला 21) और अनारक्षित वर्ग के लिए 188 (महिला 62) सीटें तय हुई हैं। कोटा नगर निगम में ओबीसी महिला मेयर बनेंगी। एससी वर्ग के लिए आरक्षण प्रक्रिया में सबसे पहले इस वर्ग की निकायवार जनसंख्या प्रतिशत को घटते क्रम में व्यवस्थित किया गया। नगरीय निकायों का परिसीमन 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर किया गया है, और साल 2014 व 2019-20 में आरक्षित रह चुकी सीटों को अपवर्जित करते हुए इस वर्ग के लिए निर्धारित 50 सीटों को क्रमानुसार जमाया गया है। सबसे ज्यादा नजर ओबीसी आरक्षण पर टिकी है, क्योंकि 60 निकाय प्रमुख पद इस वर्ग के लिए आरक्षित होने हैं, और लॉटरी के बाद ही स्पष्ट होगा कि इनमें कौन-कौन से नगर निगम, नगर परिषद और नगर पालिकाएं शामिल हैं।
पार्षद चुनाव की खर्च सीमा में भी बढ़ोतरी
निकाय चुनावों में उम्मीदवारों के लिए तय खर्च सीमा भी बढ़ा दी गई है। नगर निगम पार्षद प्रत्याशी की खर्च सीमा 2.50 लाख से बढ़ाकर 3.50 लाख रुपए कर दी गई है। नगर परिषद पार्षद के लिए यह सीमा 1.50 लाख से बढ़ाकर 2.50 लाख रुपए और नगर पालिका पार्षद के लिए 1 लाख से बढ़ाकर 1.50 लाख रुपए कर दी गई है।