राजस्थान में 17.4% कम बारिश; प. राजस्थान में सूखा, बाड़मेर-जैसलमेर के लिए राहत पैकेज
राजस्थान में 17.4% कम बारिश; प. राजस्थान में सूखा, बाड़मेर-जैसलमेर के लिए राहत पैकेज
फ्राइडे संवाद. जयपुर
मानसून सीजन बीत गया है। राजस्थान से मानसून की विदाई 17 सितंबर से शुरू हो गई थी। बारिश के लिहाज से इस बार मानसून काफी कमजोर रहा और औसत 17.40 फीसदी कम बारिश हुई। मानसून में औसत बारिश का आंकड़ा 424.71 मिमी है, जबकि इस बार केवल 350.80 मिमी बारिश हुई। पिछले साल की तुलना में यह 329.30 मिमी कम है। पिछले जून से सितंबर तक 680.13 मिमी पानी बरसा था। पश्चिमी राजस्थान में ‘सूखे की आहट’ सुनाई देने लगी है। 14 जिलों में कम बारिश हुई है, जिनमें अधिकांश पश्चिमी राजस्थान के हैं। यहां बारिश कम होने से फसलें सूख गईं। पेयजल और पशुओं के चारे-पानी का संकट है।
मुख्यमंत्री भजनलाल ने कम वर्षा वाले क्षेत्रों में आकस्मिक कार्यों के लिए जिला कलेक्टरों को एक करोड़ की राशि दी है। साथ ही बाड़मेर, बालोतरा व जैसलमेर सहित अन्य क्षेत्रों में चारा डिपो खोलने के निर्देश दिए हैं।
बांधों की स्थिति
राजस्थान के प्रमुख बांधों में भराव अपेक्षाकृत कम है। राणा प्रताप सागर की कुल क्षमता 352.81 मीटर के मुकाबले वर्तमान भराव 348.45 मीटर है। कोटा बैराज में 260.30 के मुकाबले 259.90, जवाहर सागर में 298.70 के मुकाबले 296.54, माही बजाज में 281.50 के मुकाबले 275.45 और बीसलपुर बांध में 315.50 के मुकाबले 314.00 है।
देशभर में भी कमी, पंजाब सबसे ज्यादा प्रभावित
देश के 38% हिस्से यानी 282 जिलों में कम बारिश हुई है। पंजाब में सबसे ज्यादा 41% कम बारिश हुई। इसके बाद बिहार में 32%, कर्नाटक में 30.3%, आंध्र प्रदेश में 24.3%, हरियाणा में 23.4%, तमिलनाडु में 19.7%, महाराष्ट्र में 19%, राजस्थान में 17.4%, तेलंगाना में 16.9%, गुजरात में 10.1% और हिमाचल में 10% की कमी रही। 2001 के बाद यह चौथी सबसे कम बारिश वाला साल है।
अल नीनो का असर कम हो सकता है
आईसीआईसीआई बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक, इंडियन ओशन डाइपोल (आईओडी) सूचकांक 0.76 के साथ पॉजिटिव जोन में पहुंच गया है। इससे आने वाले दिनों में अल नीनो के प्रतिकूल असर की कुछ भरपाई हो सकती है। अल नीनो अभी भी मानसून के लिए जोखिम है।