Skip to content
-
Subscribe to our newsletter & never miss our best posts. Subscribe Now!
  • https://www.facebook.com/
  • https://twitter.com/
  • https://t.me/
  • https://www.instagram.com/
  • https://youtube.com/
Friday reporter Friday reporter

दुनिया और आख़िरत की कामयाबी के लिए पढ़ते रहना जरूरी है।

Friday reporter Friday reporter

दुनिया और आख़िरत की कामयाबी के लिए पढ़ते रहना जरूरी है।

  • टॉप न्यूज़
  • देश
  • टेक – ऑटो
  • विदेश
  • जयपुर
  • राजस्थान
  • स्पोर्ट्स
  • Privacy Policy
  • Contact Us
  • टॉप न्यूज़
  • देश
  • टेक – ऑटो
  • विदेश
  • जयपुर
  • राजस्थान
  • स्पोर्ट्स
  • Privacy Policy
  • Contact Us
Close

Search

टेक - ऑटो

एआई और डीपफेक कंटेंट पर लगेगी लगाम: सरकार ने जारी किए नए नियमों का ड्राफ्ट

By Friday Sanwad
November 10, 2025 2 Min Read
0

नई दिल्ली | इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने 22 अक्टूबर को आईटी नियम 2021 में संशोधनों का मसौदा जारी किया है, जो डीपफेक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से निर्मित कंटेंट को लेबल करने और ट्रेस करने के लिए है। इस कदम का उद्देश्य गलत सूचना और चुनावी धांधली जैसी समस्याओं पर अंकुश लगाना है। नए नियम 3(3) के तहत, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को एआई से बने ‘सिंथेटिकली जेनरेटेड इंफॉर्मेशन’ पर स्पष्ट लेबल लगाना अनिवार्य होगा। साथ ही, स्थायी और अद्वितीय मेटाडेटा या आइडेंटिफायर भी एम्बेड करना होगा।
ये लेबल वीडियो में कम से कम 10% क्षेत्र कवर करेगा, या ऑडियो में पहले 10% समय में सुनाई देगा। मेटाडेटा को बदला, छिपाया या डिलीट नहीं किया जा सकेगा। प्लेटफॉर्म्स को तकनीकी उपाय अपनाने होंगे ताकि अपलोड से पहले ही एआई कंटेंट की पहचान हो सके।

**सोशल मीडिया कंपनियों की जिम्मेदारी**

मुख्य जिम्मेदारी सिग्निफिकेंट सोशल मीडिया इंटरमीडियरीज (SSMIs) पर होगी, जिनके 50 लाख से अधिक यूजर्स हैं। इसमें फेसबुक, यूट्यूब, स्नैपचैट जैसे प्लेटफॉर्म शामिल हैं। ये प्लेटफॉर्म्स लेबलिंग, मेटाडेटा टैगिंग और दृश्यता के मानकों का पालन करेंगे। मसौदा 22 अक्टूबर 2025 को जारी किया गया। MeitY 6 नवंबर तक हितधारकों से फीडबैक मांग रहा है, जो ईमेल के माध्यम से भेजा जा सकता है। उसके बाद अंतिम नियम तैयार किए जाएंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि डीपफेक मुद्दों की गंभीरता को देखते हुए ये नियम कुछ महीनों में लागू हो सकते हैं।

प्रभाव और चुनौतियां

यूजर्स के लिए यह सकारात्मक कदम है, क्योंकि अब नकली कंटेंट की आसानी से पहचान हो सकेगी और गलत सूचना कम होगी। हालांकि, कंटेंट क्रिएटर्स को अतिरिक्त कदम उठाने होंगे।
उद्योग के लिए चुनौती यह होगी कि उन्हें मेटाडेटा और सत्यापन के लिए तकनीकी निवेश करना होगा, जो परिचालन लागत बढ़ा सकता है। लेकिन समग्र रूप से, यह एआई के दुरुपयोग को रोकने में सहायक साबित होगा।

मंत्रालय का बयान

MeitY ने स्पष्ट किया कि यह कदम ‘खुला, सुरक्षित, विश्वसनीय और जवाबदेह इंटरनेट’ बनाने के लिए है, जो जनरेटिव एआई से आने वाली गलत सूचना, प्रतिरूपण और चुनावी हेरफेर जैसे जोखिमों से निपटेगा। इससे इंटरनेट अधिक भरोसेमंद बनेगा और डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र में पारदर्शिता बढ़ेगी।

Author

Friday Sanwad

Follow Me
Other Articles
Previous

तीन भारतीय-अमेरिकी दोस्तों बने दुनिया के सबसे युवा स्वनिर्मित अरबपति

Next

भारत में पत्रकारिता कितनी सुरक्षित?

No Comment! Be the first one.

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Memories News

Hot Blogs

Copyright 2026 — Friday reporter. All rights reserved. frnews.org