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दुनिया और आख़िरत की कामयाबी के लिए पढ़ते रहना जरूरी है।

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जयपुर

कम फीस में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का संकल्प: मोहम्मद सूफियान

By Friday Sanwad
December 27, 2025 2 Min Read
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ई-कॉमर्स और ज्वेलरी डिजाइनिंग में बना रहे युवा अपना करियर

फ्राइडे संवाद. जयपुर |
शिक्षा महज किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि जीवन में आत्मनिर्भरता का माध्यम है। इसी विचार को साकार करते हुए मंसूरी पब्लिक स्कूल के डायरेक्टर मोहम्मद सूफियान ने शिक्षा के पारंपरिक ढांचे में आधुनिक कौशल विकास को जोड़कर एक अनूठी पहल की है। कोरोना महामारी के बाद जिम्मेदारी संभालने वाले सूफियान का मानना है कि अगर बच्चों को शुरुआती कक्षाओं में ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले, तो उन्हें बाद में महंगे ट्यूशन की जरूरत नहीं पड़ेगी और अभिभावक अपनी मेहनत की कमाई उच्च शिक्षा में खर्च कर सकेंगे। नर्सरी से आठवीं तक की शिक्षा देने वाले इस स्कूल में प्रिंसिपल डॉ. आबिद खान साइंस पढ़ाते हैं, जबकि शारिक अली गणित की कक्षाएं संभालते हैं।

अंग्रेजी-हिंदी टाइपिंग का प्रशिक्षण

इसके साथ ही मुहम्मद सूफियान “एक्सीलेंट कॉमर्स- साइंस क्लासेस व इन्फोटेक” केंद्र भी चलाते है। यहां कॉमर्स और साइंस के साथ-साथ कंप्यूटर क्लासेस, ज्वेलरी डिजाइनिंग, ई-कॉमर्स, आर्किटेक्चर, ग्राफिक डिजाइनिंग, कैड और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे समकालीन विषय पढ़ाए जाते हैं। इसके अलावा आरएस-सीआईटी, आरएससीएफए और अंग्रेजी-हिंदी टाइपिंग का प्रशिक्षण भी दिया जाता है। इसके अलावा इंग्लिश स्पोकन और उर्दू विषय भी पढ़ाया जाता है।

स्टूडेंट जीशान कुरैशी ने महज पांच महीने में करीब चार लाख रुपये का बिजनेस

सूफियान की इस दूरदर्शिता का सबसे बड़ा उदाहरण स्टूडेंट जीशान कुरैशी हैं। जीशान ने बताया, “सही गाइडेंस के चलते मैंने ज्वेलरी डिजाइनिंग और ई-कॉमर्स में अपना करियर शुरू किया। महज पांच महीने में मैंने करीब चार लाख रुपये का बिजनेस किया है, जिसमें 20 से 25 फीसदी का शुद्ध मुनाफा हुआ।” जीशान जैसे कई छात्र आज ई-कॉमर्स साइट्स का काम सीखकर अपना खुद का व्यवसाय चला रहे हैं और आत्मनिर्भर बन रहे हैं। इस केंद्र पर अमन मंसूरी ग्राफिक डिजाइनिंग का काम देखते हैं, जबकि अर्श अली कंप्यूटर विभाग की जिम्मेदारी संभालते हैं। सूफियान का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल डिग्री देना नहीं, बल्कि व्यावहारिक कौशल से लैस करना है ताकि युवा नौकरी की तलाश में भटकने की बजाय खुद का रोजगार शुरू कर सकें।

नए-नए कोर्स लाने की कोशिश

हालांकि, सूफियान इस बात से चिंतित हैं कि क्षेत्र में बच्चों में पढ़ने का रुझान काफी कम है। उन्होंने कहा, “अभिभावक अपने बच्चों की शिक्षा पर खर्च करने से कतराते हैं। जब तक मुस्लिम समाज शिक्षा पर निवेश नहीं करेगा, तब तक वह दूसरे समुदायों के साथ कदम से कदम मिलाकर देश की प्रगति में योगदान नहीं दे सकता।” सूफियान लगातार नए-नए कोर्स लाने की कोशिश में जुटे हैं ताकि बच्चे अपने करियर को बेहतर तरीके से तराश सकें। उनका मानना है कि शिक्षा में निवेश ही समाज और देश के उज्ज्वल भविष्य की नींव है।

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Friday Sanwad

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