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हेल्थ

क्या भारत में बिकने वाले अंडों से कैंसर का खतरा?

By Friday Sanwad
December 18, 2025 2 Min Read
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सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दावों में यह कहा जा रहा है कि अंडों में पाए जाने वाले एंटीबायोटिक नाइट्रोफ्यूरान के अंश कैंसर का कारण बन सकते हैं। इन दावों ने लोगों के बीच अनावश्यक डर पैदा कर दिया है। लेकिन वैज्ञानिक तथ्यों को देखें तो सच्चाई इससे कहीं अधिक संतुलित और स्पष्ट है। नाइट्रोफ्यूरान एंटीमाइक्रोबियल दवाओं का एक वर्ग है, जिनका इस्तेमाल पहले पोल्ट्री और पशुओं में किया जाता था। भारत सहित कई देशों में इन पर प्रतिबंध इसलिए लगाया गया क्योंकि प्रयोगशाला में जानवरों को बहुत अधिक मात्रा में देने पर इनमें कैंसरकारी प्रभाव देखे गए। हालांकि, बाजार में जांचे गए अंडों में पाए गए इसके अवशेष बेहद कम मात्रा में होते हैं। उदाहरण के तौर पर, एक ब्रांड के अंडों में AOZ नामक अवशेष 0.74 माइक्रोग्राम प्रति किलोग्राम पाया गया, जो भारत में तय सीमा (1 माइक्रोग्राम/किग्रा) से भी कम है। विशेषज्ञों के अनुसार, नाइट्रोफ्यूरान को लेकर जो कैंसर से जुड़े अध्ययन हैं, वे अधिकतर चूहों पर किए गए थे, जिनमें दवाओं की खुराक वास्तविक खाद्य अवशेषों से सैकड़ों गुना ज्यादा थी। इतनी कम मात्रा में पाए जाने वाले अवशेषों से कैंसर होने का कोई प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं है। दिलचस्प बात यह भी है कि नाइट्रोफ्यूरान से जुड़ी दवा नाइट्रोफ्यूरेंटॉइन (Nitrofurantoin) का इस्तेमाल दशकों से इंसानों में, यहां तक कि गर्भावस्था में भी, सुरक्षित रूप से किया जाता रहा है। FSSAI और ICAR जैसी संस्थाओं की रिपोर्ट बताती है कि 2023 में जांचे गए 98% से अधिक पोल्ट्री नमूने सुरक्षित पाए गए। सोशल मीडिया पोस्ट प्रयोगशाला के आंकड़ों को आम जीवन से जोड़कर भ्रम फैलाती हैं। एक आम मिथक यह है कि “एंटीबायोटिक वाला कोई भी अंडा सीधे कैंसर करेगा”, जो पूरी तरह गलत है। अंडे पोषण से भरपूर होते हैं। इनमें उच्च गुणवत्ता का प्रोटीन, विटामिन B12, कोलीन और ओमेगा-3 फैटी एसिड होते हैं। किसी भी सरकारी या वैज्ञानिक संस्था ने अंडे खाने से परहेज की सलाह नहीं दी है। उपभोक्ताओं को चाहिए कि वे भरोसेमंद और प्रमाणित स्रोतों से अंडे खरीदें और उन्हें अच्छी तरह पकाकर खाएं।

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Friday Sanwad

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