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हेल्थ

फारस की प्रसिद्ध डिश “पुलाव” से शुरू हुआ था बिरयानी का लजीज सफर

By Friday Sanwad
March 7, 2026 2 Min Read
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बिरयानी आज भारत के सबसे लोकप्रिय व्यंजनों में गिनी जाती है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इसकी जड़ें देश के बाहर से जुड़ी हैं। एक दिलचस्प कहानी के अनुसार, जब मुगल शासक भारत आए, तो वे अपने साथ फारस की प्रसिद्ध डिश “पुलाव” भी लाए थे। फारस में पुलाव को चावल, मांस और सूखे मेवों को अलग-अलग पकाकर बनाया जाता था। कहानी के मुताबिक, मुगल दरबार के एक खास रसोईये ने भारतीय मसालों की खुशबू और स्वाद को इस विदेशी व्यंजन में मिला दिया। उसने चावल, मांस और देसी मसालों को एक साथ “दम” पर पकाया। धीमी आंच, बंद ढक्कन और मेहनत से बनी इस डिश की खुशबू ने पूरे दरबार को मंत्रमुग्ध कर दिया। बादशाह ने पहला निवाला लिया और कहा, “यह पुलाव नहीं, यह तो बिरयानी है।” यहीं से बिरयानी का सफर शुरू हुआ।

हैदराबादी बिरयानी अपनी खुशबू और मसालों के लिए मशहूर

इसके बाद यह शाही व्यंजन अलग-अलग शहरों में फैलता गया। दिल्ली से लेकर लखनऊ तक, फिर हैदराबाद और अंत में कोलकाता तक, हर जगह बिरयानी ने अपना अलग रंग और स्वाद अपनाया। कहीं इसमें तीखे मसाले जुड़े, कहीं हल्की मिठास आई, तो कहीं आलू जैसे अनोखे प्रयोग हुए। हैदराबादी बिरयानी अपनी खुशबू और मसालों के लिए मशहूर है, तो कोलकाता की बिरयानी आलू और हल्के स्वाद के कारण अलग पहचान रखती है। लखनऊ की अवधी बिरयानी अपने नफासत भरे स्वाद के लिए जानी जाती है, जबकि दिल्ली की बिरयानी में मुगलई असर साफ दिखाई देता है।
आज बिरयानी सिर्फ एक खाना नहीं, बल्कि संस्कृति और इतिहास का प्रतीक बन चुकी है। यह बताती है कि कैसे विदेशी परंपरा और भारतीय मसालों के मेल से एक ऐसा व्यंजन बना, जिसने हर दिल जीत लिया। यही वजह है कि बिरयानी आज भी शाही, गर्मजोशी से भरी और दिल से बनाई जाने वाली डिश मानी जाती है।

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