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भारतीय स्टार्टअप्स का 2025: 11 अरब डॉलर की फंडिंग, पर डील्स में 39% की गिरावट

By Friday Sanwad
January 2, 2026 2 Min Read
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नई दिल्ली
साल 2025 भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए उतार-चढ़ाव भरा रहा। ट्रैक्सन के आंकड़ों के अनुसार, देश के स्टार्टअप्स ने कुल 10.5 अरब डॉलर (करीब 11 अरब डॉलर) की फंडिंग जुटाई, लेकिन निवेशकों की बढ़ती सतर्कता के चलते डील्स की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई। 2024 की तुलना में फंडिंग राउंड्स 39 फीसदी घटकर 1,518 रह गए।

फंडिंग के आंकड़े

कुल फंडिंग में साल-दर-साल 17 फीसदी से अधिक की गिरावट आई। सबसे बड़ा झटका सीड-स्टेज फंडिंग को लगा, जो 30 फीसदी घटकर 1.1 अरब डॉलर रह गई। निवेशक नए और प्रयोगात्मक आइडिया में जोखिम लेने से बच रहे हैं।
लेट-स्टेज फंडिंग भी 26 फीसदी घटकर 5.5 अरब डॉलर पर आ गई, क्योंकि निवेशक अब मुनाफे और एग्जिट संभावनाओं को लेकर ज्यादा सख्ती बरत रहे हैं। इसके विपरीत, अर्ली-स्टेज फंडिंग में 7 फीसदी की वृद्धि हुई और यह 3.9 अरब डॉलर तक पहुंच गई। ट्रैक्सन की सह-संस्थापक नेहा सिंह के अनुसार, निवेशकों का फोकस अब मजबूत प्रोडक्ट-मार्केट फिट और स्पष्ट राजस्व वाले शुरुआती स्टार्टअप्स पर है।

एआई स्टार्टअप्स की चमक

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) स्टार्टअप्स ने 2025 में करीब 643 मिलियन डॉलर जुटाए, जो पिछले साल से 4.1 फीसदी अधिक है। लाइटस्पीड के पार्टनर राहुल तनेजा के अनुसार, एआई स्टार्टअप्स कुल डील्स का 30-40 फीसदी हिस्सा रहे। निवेशक भारी पूंजी वाले मॉडल्स की बजाय एप्लिकेशन-आधारित एआई बिजनेस को प्राथमिकता दे रहे हैं। वेंचर कैपिटल का रुझान अब मैन्युफैक्चरिंग और डीप-टेक सेक्टर की ओर बढ़ रहा है, जहां भारत को वैश्विक प्रतिस्पर्धा अपेक्षाकृत कम झेलनी पड़ती है। सरकार ने जनवरी 2025 में 1.15 अरब डॉलर का फंड ऑफ फंड्स घोषित किया। इसके अलावा, ऊर्जा परिवर्तन, क्वांटम कंप्यूटिंग, रोबोटिक्स, स्पेस टेक, बायोटेक और AI के लिए 1 ट्रिलियन रुपये की रिसर्च और इनोवेशन योजना शुरू की गई।

बड़े स्टार्टअप्स का बंद होना

2025 में कई चर्चित स्टार्टअप्स को अपना कारोबार बंद करना पड़ा। इनमें प्रमुख नाम हैं:

हाइक (Hike):** 2012 में केविन मित्तल द्वारा शुरू की गई मैसेजिंग ऐप, जिसने टाइगर ग्लोबल, सॉफ्टबैंक और टेनसेंट से 25 करोड़ डॉलर जुटाए थे। सितंबर 2025 में सरकार द्वारा रियल मनी गेमिंग ऐप्स पर प्रतिबंध लगाने के बाद हाइक बंद हो गई।

डंजो (Dunzo): हाइपरलोकल डिलीवरी कंपनी, जिसे 2022 में रिलायंस रिटेल से 24 करोड़ डॉलर मिले थे। जेप्टो, स्विगी इंस्टामार्ट और ब्लिंकइट की कड़ी प्रतिस्पर्धा में 2025 में बंद हो गई।

ओटिपी (Otipy): 2020 में शुरू हुई सब्सक्रिप्शन बेस्ड ग्रोसरी डिलीवरी स्टार्टअप, फंडिंग की कमी के चलते बंद हुई।

ब्लूस्मार्ट (BluSmart): 2019 में शुरू हुई ईवी कैब सर्विस, वित्तीय अनियमितताओं और घाटे के कारण बंद हुई।
2025 ने साबित किया कि केवल अच्छा आइडिया ही काफी नहीं है। मजबूत फंडिंग, टिकाऊ बिजनेस मॉडल और बाजार में लचीलापन स्टार्टअप्स की सफलता के लिए जरूरी हैं। निवेशक अब सतर्क हो गए हैं और सिर्फ मुनाफा देने वाले बिजनेस मॉडल में ही निवेश कर रहे हैं।

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