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राजस्थान मदरसा: कैसे सुधरेगा हमारा मुस्तकबिल: जब 25% बच्चो के पास कॉपी- पेन ही नहीं

By Friday Sanwad
December 18, 2025 2 Min Read
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करीब 6.78 लाख बच्चे बुनियादी शिक्षा से महरूम

फ्राइडे संवाद. जयपुर
राजस्थान में करीब 6.78 लाख मदरसा छात्र बुनियादी शिक्षा से महरूम है। फ्राइडे संवाद द्वारा जयपुर व आसपास के क्षेत्रों में किए गए स्थानीय सर्वे में सामने आया कि कई मदरसों में बच्चों के पास कॉपी-कलम, फर्नीचर, शौचालय, पेयजल और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। आधिकारिक आंकड़े एक चौंकाने वाली तस्वीर पेश करते हैं—3,454 पंजीकृत मदरसों में 2.04 लाख (5%) छात्र पढ़ते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि गैर-पंजीकृत मदरसों की संख्या और उनमें पढ़ने वाले बच्चों का कोई स्पष्ट सरकारी डाटा उपलब्ध नहीं है, लेकिन असली संकट 8,000 गैर-पंजीकृत संस्थानों में है, जहां 4.73 लाख (11.52%) बच्चे आधुनिक शिक्षा की मुख्यधारा से कटे हुए हैं। कुल मिलाकर 16.52% मुस्लिम बच्चे ऐसी व्यवस्था में फंसे हैं जो न तो पारदर्शी है और न ही गुणवत्तापूर्ण। वर्तमान में मात्र 5,600 पैरा-टीचर्स लाखों बच्चों के भविष्य का बोझ उठा रहे हैं।

बुनियादी ढांचे का संकट

राजस्थान मदरसा बोर्ड के आंकड़े बताते हैं कि केवल जयपुर में 280 पंजीकृत मदरसे हैं, लेकिन गैर-पंजीकृत संस्थानों की भीड़ ने शिक्षा को व्यापार बना दिया है। एक सर्वे के मुताबिक, 70% मदरसों में बुनियादी सुविधाएं—शौचालय, पेयजल, बिजली—नदारद हैं। ग्रामीण इलाकों में टूटे-फूटे भवनों में बैठकर बच्चे शिक्षा पाने को मजबूर हैं। जोधपुर, बीकानेर, अलवर जैसे जिलों में 40% से अधिक छात्र अनियमित संस्थानों पर निर्भर हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के बावजूद, इन मदरसों में विज्ञान, गणित, कंप्यूटर जैसे आधुनिक विषय नहीं पढ़ाए जाते। एनसीईआरटी आधारित एक अध्ययन बताता है कि मदरसा छात्रों की साक्षरता दर सामान्य स्कूलों से 25% कम है।

धोखाधड़ी का जाल

पंजीकृत व गैर-पंजीकृत मदरसों की बाढ़ ने फर्जीवाड़े को बढ़ावा दिया है। ग्रामीण इलाकों में टूटे-फूटे भवन, बिना बिजली-पानी के कक्षाएं चल रही हैं। धोखाधड़ी का आलम यह कि कई मदरसे सरकारी अनुदान हजम कर लेते हैं, बिना छात्रों को कुछ दिए। पारदर्शिता की कमी के कारण पात्र बच्चे सरकारी योजनाओं से वंचित रह जाते हैं।

राजस्थान मदरसा बोर्ड के गठन और वर्तमान स्थिति

राजस्थान मदरसा बोर्ड की स्थापना 27 जनवरी 2003 को जयपुर में की गई थी, जिसे 2020 में वैधानिक दर्जा दिया गया। इसका मुख्य उद्देश्य मदरसों में दीनी तालीम के साथ आधुनिक शिक्षा को जोड़ना है। वर्तमान में बोर्ड से लगभग 3,700 से अधिक मदरसे पंजीकृत हैं। हालांकि, 2024-25 में बोर्ड प्रशासनिक विवादों (चेयरमैन बनाम सचिव) और बजट की कमी से जूझ रहा है। केंद्र सरकार की ‘SPQEM’ योजना बंद होने से वित्तीय संकट बढ़ा है।

चुनौतियां: शिक्षकों की किल्लत, अविकसित इंफ्रास्ट्रक्चर, और फर्जीवाड़ा। समाधान के लिए जरूरी है गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक भवन, सीसीटीवी निगरानी, और महिला शिक्षिकाओं की भर्ती।

समाधान की दरकार: विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक मदरसों को आधुनिक तकनीक और पारदर्शी व्यवस्था से नहीं जोड़ा जाएगा, सुधार संभव नहीं है।

बुनियादी सुधार: सीसीटीवी और बायोमेट्रिक उपस्थिति जैसी तकनीकों से जवाबदेही तय करनी होगी।
महिला शिक्षकों की भागीदारी: छात्राओं को शिक्षा से जोड़ने के लिए महिला शिक्षकों की नियुक्ति अनिवार्य है।
कौशल विकास: केवल धार्मिक शिक्षा नहीं, बल्कि गणित, विज्ञान और कंप्यूटर को प्राथमिकता देनी होगी ताकि ये बच्चे प्रतिस्पर्धा में खड़े हो सकें।

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Friday Sanwad

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