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वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की मंजूरी वापस, बुनियादी सुविधाओं की कमी का हवाला?

By Friday Sanwad
January 9, 2026 2 Min Read
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जम्मू। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) ने जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस से एमबीबीएस कोर्स चलाने की मंजूरी वापस ले ली है। यह कॉलेज 2025-26 सत्र के लिए 50 सीटों पर एमबीबीएस कोर्स शुरू करने वाला था।

विवाद की शुरुआत: कॉलेज के पहले बैच में 50 में से 44 छात्र मुस्लिम थे, जिन्हें नीट में उनकी मेरिट के आधार पर चुना गया था। इस पर स्थानीय लोगों और कुछ हिंदू संगठनों ने विरोध जताया। उनका तर्क था कि कॉलेज श्री माता वैष्णो देवी श्राइन के दान से बना है, जो मुख्य रूप से हिंदू भक्तों का है, इसलिए हिंदू छात्रों को आरक्षण मिलना चाहिए। इस मुद्दे पर काफी हंगामा हुआ और कुछ लोगों ने एडमिशन रद्द करने की मांग की।

एनएमसी का फैसला: एनएमसी की मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड (एमएआरबी) ने दिसंबर 2024 में विस्तृत निरीक्षण के बाद कॉलेज को एमबीबीएस कोर्स चलाने की इजाजत दी थी। लेकिन पिछले दो हफ्तों में एनएमसी को कॉलेज की सुविधाओं पर कई गंभीर शिकायतें मिलीं। इसके बाद एमएआरबी ने अचानक निरीक्षण करवाया, जिसमें शिकायतें सही पाई गईं।

सुविधाओं की कमी: एनएमसी ने कहा कि कॉलेज में बुनियादी सुविधाओं की गंभीर कमी है। पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं है, क्लिनिकल सामग्री की कमी है, योग्य शिक्षकों की कमी है और रेजिडेंट डॉक्टरों की संख्या अपर्याप्त है। एनएमसी के पत्र में कहा गया, “कमियां बहुत बड़ी और गंभीर हैं। अगर कॉलेज ऐसे ही चलता तो मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता खराब होती और छात्रों का भविष्य प्रभावित होता।”
एनएमसी के इस फैसले के बाद सोशल मीडिया पर लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या मंजूरी वापसी का असली कारण सुविधाओं की कमी है या मुस्लिम छात्रों का अधिक एडमिशन। हालांकि, एनएमसी ने स्पष्ट रूप से बुनियादी सुविधाओं की कमी को मंजूरी वापसी का कारण बताया है।

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