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दुनिया और आख़िरत की कामयाबी के लिए पढ़ते रहना जरूरी है।

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एजुकेशन | जॉब

शिक्षा की अलख जगाता डीएचपी फाउंडेशन: फतेहपुर में नए भवन निर्माण का शिलान्यास

By Friday Sanwad
October 30, 2025 7 Min Read
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शिक्षा के माध्यम से सामाजिक परिवर्तन सम्भव: दाऊद हनीफ़ पिनारा

एफआर न्यूज | विशेष रिपोर्ट

शेखावाटी के फतेहपुर में शिक्षा के क्षेत्र में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। डी.एच.पी. फाउंडेशन द्वारा राजकीय श्रीकृष्णा उच्च माध्यमिक विद्यालय – फतेहपुर के नवीन भवन निर्माण का शिलान्यास आगामी 6 नवंबर 2025, बुधवार को किया जा रहा है। यह नया भवन फाउंडेशन की उस पहल का हिस्सा है, जिसके तहत समाज के गरीब और जरूरतमंद छात्रों को निःशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराई जाएगी। यह भवन मरहूम ‘असद बिन फरहत’ की याद व ईसाले सवाब के लिए शिक्षा विभाग, राजस्थान सरकार को भेंट स्वरूप समर्पित किया जाएगा। फाउंडेशन के सह-संस्थापक आदिल दाऊद पीनारा ने बताया कि यह कदम शिक्षा के प्रचार-प्रसार और समुदाय के विकास की दिशा में एक छोटा लेकिन ऐतिहासिक प्रयास है।

दाऊद हनीफ़ पिनारा: राजस्थान के लिए प्रेरणास्रोत

“फाउंडेशन के अध्यक्ष दाऊद हनीफ़ पिनारा का जीवन संघर्ष, ईमानदारी और समाजसेवा की प्रेरणादायक मिसाल माना जाता है।” 14 जुलाई 1953 (शैक्षिक रिकॉर्ड अनुसार) अथवा फरवरी 1951 (पारिवारिक हिसाब से) को जन्मे हनीफ़ फरवरी 2026 में 75 वर्ष के हो जाएंगे। सात दशक से अधिक का यह सफर शिक्षा, मेहनत और समाजहित के कार्यों से परिपूर्ण रहा है।

शिक्षा की शुरुआत मदरसा अशरफुल उलूम से हुई

स्थानीय शिक्षण संस्थानों से शिक्षा प्राप्त करने वाले दाऊद पीनारा ने अपनी शैक्षणिक यात्रा के संस्मरणों को साझा करते हुए 1960 और 70 के दशक की शिक्षा व्यवस्था और सामाजिक सद्भाव की मिसाल पेश की। उन्होंने बताया कि उनकी शिक्षा की शुरुआत मदरसा अशरफुल उलूम से हुई, जहाँ 1959 में मौलवी वलीउल्लाह जैसे काबिल और मेहनती उस्ताद से कुरान शरीफ का पहला सिपारा पढ़ा। यद्यपि मौलवी साहब एक साल से भी कम समय मदरसे में रहे और बाद में उत्तर प्रदेश चले गए, लेकिन उनकी शिक्षा का प्रभाव गहरा रहा। इसके बाद मोहल्ले के ही कई सम्मानित उस्तादों – मरहूम इस्माईल मुल्ला सोलंकी साहब, अब्दुल कुद्दूस साहब, मौलवी शम्‌ऊन साहब और मौलवी लाल मोहम्मद साहब से दीनी तालीम हासिल की।

हर विषय के विद्वान शिक्षकों का मिला सानिध्य

1961-62 में जब अशरफुल उलूम मदरसा का राजस्थान शिक्षा विभाग में औपचारिक रजिस्ट्रेशन हुआ, तो यह आजाद स्कूल के नाम से जाना जाने लगा। यहाँ मास्टर दीनदयाल जी मिश्रा और जनाब तकरीम हुसैन जैसे काबिल शिक्षकों से शिक्षा प्राप्त करते हुए उन्होंने 1966 में आठवीं कक्षा (मिडिल) उत्तीर्ण की। उसी वर्ष 1 जुलाई को चमड़िया सेकेंडरी स्कूल में नौवीं कक्षा में दाखिला लिया। वे भावुक होकर बताते हैं, “चमड़िया सेकेंडरी स्कूल में प्रवेश लेते ही ऐसा लगा जैसे ज्ञान के सारे दरवाजे मुझ पर खुल गए हैं।” यहाँ हर विषय के एक से बढ़कर एक विद्वान शिक्षकों का सानिध्य मिला। 1968 में उन्होंने फर्स्ट डिवीजन से दसवीं परीक्षा उत्तीर्ण की और उसी वर्ष 1 जुलाई को चमड़िया कॉलेज की Pre B.Sc (11वीं कक्षा) में दाखिला लिया।

विद्यालय और महाविद्यालय जीवन की अनमोल यादें

चमड़िया कॉलेज में प्रवेश के बाद हनीफ़ को ऐसा लगा मानो ज्ञान के नए द्वार खुल गए हों। अप्रैल 1972 में उन्होंने फिजिक्स, केमिस्ट्री और गणित विषयों के साथ B.Sc की डिग्री सेकंड डिवीजन से पूरी की। चमड़िया कॉलेज में वे वाइस प्रेसिडेंट भी रहे। कॉलेज के दत्ता जी (हिंदी) और सुधांशु जी (गणित) जैसे विद्वान शिक्षकों का मार्गदर्शन उन्हें मिला। हनीफ़ साहब को अंग्रेज़ी भाषण प्रतियोगिताओं में विशेष रुचि थी। उन्होंने कई English Debates में कॉलेज का प्रतिनिधित्व कर पुरस्कार प्राप्त किए। उस समय राजस्थान के छात्रों में अंग्रेज़ी ज्ञान कम था, इसलिए वे प्रतियोगिताओं में अलग पहचान बना सके।

पहले विज्ञान स्नातक बने व्यापारी समाज से

1972 में दाऊद हनीफ़ पिनारा फतेहपुर के व्यापारी समाज के पहले ऐसे छात्र बने जिन्होंने विज्ञान विषय में B.Sc की डिग्री हासिल की।
उस समय मुस्लिम समाज के अधिकांश छात्र विज्ञान को कठिन मानकर उससे दूरी बनाए रखते थे। उनसे पहले व्यापारी समाज से केवल अनवर गौरी साहब ने मुंबई से B.A LLB किया था।
यह उपलब्धि समाज में शिक्षा के क्षेत्र में नई सोच का प्रतीक बनी। हनीफ़ मानते हैं — “कड़ी मेहनत, सच्चाई और सकारात्मक सोच ज़िंदगी में कामयाबी की जमानत है। अगर इंसान ईमानदारी से अपने मिशन पर कायम रहे, तो सफलता तय है।”

आर्थिक संघर्ष और आत्मनिर्भरता का दौर

कॉलेज शिक्षा के दौरान ही उन्होंने पारिवारिक रूई के व्यवसाय में हाथ बँटाना शुरू किया। उस समय उच्च शिक्षा के खर्चे सीमित थे। मैट्रिक में प्रथम श्रेणी प्राप्त करने पर उन्हें ₹420 की स्कॉलरशिप मिली, जिसने आगे की पढ़ाई में मदद की। यही राशि उस दौर में कई मेधावी छात्रों के लिए उच्च शिक्षा की शुरुआत का आधार बनी।
20 नवंबर 1971 को पढ़ाई के दौरान ही उनका विवाह हुआ। परिवार की जिम्मेदारियों के साथ उन्होंने कार्यक्षेत्र की दिशा में कदम बढ़ाया।

विदेश यात्रा और अंतरराष्ट्रीय अनुभव

B.Sc के बाद दाऊद हनीफ़ ने व्यावहारिक अनुभव के लिए Gypsum व्यवसाय में अपने ससुर मरहूम मोहम्मद सिद्दीक गौरी के मार्गदर्शन में अहमदाबाद में कुछ समय बिताया। वहीं से उन्होंने अक्टूबर 1972 में पासपोर्ट बनवाया। 1973 में वे मुंबई गए, जहाँ क़य्यूम भाटी साहब की देखरेख में जॉली मेकर बिल्डिंग जैसे प्रतिष्ठित निर्माण प्रोजेक्ट पर कार्य का अनुभव प्राप्त किया। 28 अगस्त 1973 को वे ओमान के सलालाह पहुँचे और Mothercat नामक अंतरराष्ट्रीय कंपनी से जुड़ गए। तीन वर्ष सलालाह में और फिर दो वर्ष (1976-78) मसीराह द्वीप पर कार्य किया।
इसके बाद 1978 से 1980 तक ओमान के मुसन्दम प्रायद्वीप में कंपनी के विभिन्न प्रोजेक्ट संभाले — जिनमें Cessna विमान, Bell Helicopters, Landing Crafts और Desalination Plants की सेवाओं का प्रबंधन शामिल था। 1980 से वे संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में बस गए और वहाँ अपना निजी कंस्ट्रक्शन, इंटीरियर और रियल एस्टेट व्यवसाय स्थापित किया। 1985 से परिवार सहित शारजाह में निवास कर रहे हैं। उनके एक पुत्र और चार पुत्रियाँ हैं, जो सभी उच्च शिक्षा प्राप्त कर डी.एच.पी. फाउंडेशन से जुड़े समाजसेवा के कार्यों में सहयोग कर रहे हैं।

डी.एच.पी. फाउंडेशन की स्थापना – सेवा का नया अध्याय

2010 में दाऊद हनीफ़ पिनारा ने डी.एच.पी. फाउंडेशन की स्थापना की, जिसका मुख्य उद्देश्य शिक्षा, स्वास्थ्य और समाजसेवा के क्षेत्रों में कार्य करना है। इस संस्था ने शिक्षा के प्रचार-प्रसार, स्वास्थ्य सहायता, आपदा राहत और सामाजिक उत्थान में उल्लेखनीय भूमिका निभाई है।
फाउंडेशन ने फतेहपुर में कई शिक्षण संस्थानों को सहयोग दिया, जिनमें शामिल हैं —
एपीएस सीनियर स्कूल, आज़ाद सीनियर स्कूल, मदरसा अशरफुल उलूम, इस्लामिया सीनियर स्कूल ईदगाह, राजकीय श्रीकृष्णा सीनियर स्कूल, नेवटिया सीनियर स्कूल, श्री लक्ष्मीनाथ सीनियर स्कूल, राजकीय शहीद मोहम्मद इमरान खान सीनियर स्कूल रोलसाबसर और स्काउट भवन आदि। इन संस्थानों में भवन निर्माण, मरम्मत और आवश्यक संसाधनों की पूर्ति हेतु डी.एच.पी. फाउंडेशन ने लगातार योगदान दिया है।

फतेहपुर के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका

हनीफ़ ने देखा कि स्वतंत्रता के बाद फतेहपुर का पूर्वी क्षेत्र तो शिक्षा और विकास में आगे बढ़ा, पर पश्चिमी फतेहपुर अब भी पिछड़ा रहा। यहाँ गरीब और वंचित आबादी निवास करती थी, जहाँ शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएँ सीमित थीं। इस असमानता को दूर करने के लिए डी.एच.पी. फाउंडेशन ने राजस्थान सरकार के साथ मिलकर अनेक परियोजनाएँ शुरू कीं। उन्होंने क्षेत्रीय विधायक हाकम अली खान को विशेष धन्यवाद दिया जिनके प्रयासों से महिला कॉलेज, अल्पसंख्यक आवासीय विद्यालय और रघुनाथपुरा शहरी स्वास्थ्य केंद्र जैसे संस्थान बने। इन निर्माणों के लिए डी.एच.पी. फाउंडेशन ने करोड़ों रुपये मूल्य की भूमि राज्य सरकार को भेंट की। फाउंडेशन ने फातमा-तुल-ज़ोहरा सीनियर सेकेंडरी स्कूल, मदरसा लीलगरान और व्यापारियान कब्रिस्तान के लिए भी ज़मीन वक्फ की है। यह योगदान फतेहपुर में शिक्षा और सामाजिक एकता का प्रतीक बन चुका है।

शिक्षा के लिए समर्पण और अंतरराष्ट्रीय पहचान

शिक्षा के प्रचार हेतु फाउंडेशन ने राजस्थान में TEDx कार्यक्रमों का आयोजन कराया — जो राज्य के पहले टेडएक्स कार्यक्रम थे। इसके साथ ही, मेधावी और जरूरतमंद छात्रों को उच्च शिक्षा हेतु स्कॉलरशिप प्रदान की गई। कोरोना काल में फाउंडेशन ने पीड़ितों की सहायता, चिकित्सा उपकरणों और राहत सामग्री के वितरण में भी अग्रणी भूमिका निभाई।

आदर्श शिक्षण संस्थान का सपना

वर्तमान में डी.एच.पी. फाउंडेशन राजकीय श्रीकृष्णा सीनियर स्कूल, फतेहपुर में विशाल भवन निर्माण करवा रहा है। इस परियोजना के पहले चरण में 12 बड़े कक्ष, बरामदे, दो प्रवेश द्वार, जेंट्स और लेडीज़ के लिए 8-8 टॉयलेट, दो लॉबी और कम्पाउंड वॉल का निर्माण प्रस्तावित है।
दूसरे चरण में अतिरिक्त 12 कक्ष और सुविधाएँ जोड़ी जाएंगी। पूरे प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत ₹6 करोड़ है। फाउंडेशन का उद्देश्य है कि यह स्कूल क्षेत्र का एक आदर्श शिक्षण संस्थान बने, जहाँ विज्ञान, वाणिज्य, कला, कंप्यूटर, प्रयोगशालाएँ और पुस्तकालय की सभी सुविधाएँ उपलब्ध हों।

फतेहपुर के शिक्षण इतिहास का आभार

दाऊद हनीफ़ पिनारा चमड़िया कॉलेज और उसके दानवीर परिवार के प्रति विशेष श्रद्धा व्यक्त करते है- “अगर सेठ गोरखनाथ चमड़िया परिवार की दानशीलता न होती, तो फतेहपुर के हजारों विद्यार्थी उच्च शिक्षा से वंचित रह जाते। मैं स्वयं भी उसी दानशीलता का लाभार्थी हूँ।”

जीवन का दर्शन

हनीफ़ कहते हैं — “जीवन में कठिन परिश्रम, सच्चाई और सकारात्मक सोच को अपना लें तो सफलता निश्चित है। यही सिद्धांत मेरे जीवन की नींव हैं।”

नई पीढ़ियों के लिए दिशा

आज दाऊद हनीफ़ पिनारा न केवल फतेहपुर के, बल्कि पूरे राजस्थान के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उनकी संस्था डी.एच.पी. फाउंडेशन शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक उत्थान में जो कार्य कर रही है, वह आने वाली पीढ़ियों को दिशा दे रही है। उनका पूरा जीवन इसी सोच का प्रमाण है। साधारण परिवार से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुँचना, फिर अपनी मिट्टी के लोगों की सेवा में लग जाना — यही उनका सबसे बड़ा परिचय है। दाऊद हनीफ़ पिनारा जीवन बताता है कि अगर नीयत साफ़ हो और इरादा मजबूत, तो इंसान किसी भी मुकाम तक पहुँच सकता है।
(यह लेख समाजसेवी दाऊद हनीफ़ पिनारा के जीवन व कार्यों पर आधारित है।)

शिलान्यास समारोह: 6 नवंबर 2025, बुधवार
स्थान: राजकीय श्रीकृष्णा उच्च माध्यमिक विद्यालय, फतेहपुर शेखावाटी

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Friday Sanwad

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