सीजेआई सूर्यकांत के बयानों पर अभिजीत दिपके का सवाल, कहा चुनाव आयोग पर कार्रवाई कहां है?
नई दिल्ली. दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों और कानून-व्यवस्था को लेकर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत से सवाल किया है कि अगर कानून-व्यवस्था सुप्रीम कोर्ट के अधिकार क्षेत्र का विषय नहीं है, तो चुनाव आयोग के खिलाफ अदालत ने क्या कार्रवाई की है? दिपके ने कहा कि चुनाव आयोग के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अगर अदालत मतदाताओं से कह सकती है कि वे इस बार वोट नहीं दे पाए तो अगली बार दे सकते हैं, तो क्या यही बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी कही जाएगी? (बंगाल एसआईआर की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी चर्चा में रही थी कि जो लोग इस बार वोट नहीं दे सके। कोई बात नहीं। ऐसे लोग अगली बार वोट दे देंगे) पीटीआई के मुताबिक, दिपके ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए पश्चिम बंगाल में SIR के दौरान मतदाताओं के नाम हटाए जाने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को स्पष्ट करना चाहिए कि अगर किसी मतदाता को इस बार मतदान करने से वंचित किया जा सकता है, तो क्या यही सिद्धांत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चुनाव लड़ने पर भी लागू होगा। दिपके की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका और SIR के तहत मतदाता सूची में किए गए बदलावों को लेकर विवाद तेज है। विपक्षी दल और छात्र संगठन ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
सीजेआई सूर्यकांत ने कानून-व्यवस्था पर क्या कहा था?
दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों और उन पर लगाए गए प्रतिबंधों को लेकर सवाल पूछे जाने पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा था: “ये लॉ एंड ऑर्डर का मुद्दा है। ये मेरा विषय नहीं है।” यह टिप्पणी सोमवार को दिल्ली में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के एक कार्यक्रम के दौरान सामने आई थी। हालांकि, सीजेआई ने यह भी कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे सभी के लिए खुले हैं, चाहे वे आम नागरिक हों या जनप्रतिनिधि। उनकी टिप्पणी ऐसे समय आई, जब दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन हो रहे थे और विपक्षी दल चुनाव आयोग के खिलाफ अपनी शिकायतें अदालत तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे थे।
केरल कांग्रेस की पोस्ट से भी उठा विवाद
सीजेआई की टिप्पणी के बाद कांग्रेस की केरल इकाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट प्रकाशित की थी। पोस्ट में मुख्य न्यायाधीश को संबोधित करते हुए कहा गया था कि यदि कानून-व्यवस्था उनके अधिकार क्षेत्र का विषय नहीं है, तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए और ऐसे व्यक्ति को जिम्मेदारी सौंपनी चाहिए जो इस स्थिति को संभाल सके। पोस्ट में लिखा गया था:
“If law and order is not your domain, resign now. We will find your replacement who can handle it.”
इस पोस्ट को बाद में हटा दिया गया। अभिजीत दिपके ने इस पोस्ट पर टिप्पणी करने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि वह इस समय कांग्रेस की केरल इकाई की टिप्पणी पर कुछ नहीं कहना चाहते।
चुनाव आयोग के भीतर मतभेद की रिपोर्ट से बढ़ा विवाद
SIR को लेकर विवाद उस समय और गहरा गया, जब द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार चुनाव आयोग के कुछ फैसलों और आदेशों पर आपत्ति दर्ज कराई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों चुनाव आयुक्तों ने कुछ मामलों में आरोप लगाया कि फैसले उनकी जानकारी या सहमति के बिना लिए गए। इन आपत्तियों में मतदाता पंजीकरण के लिए फॉर्म-6 में बदलाव, मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया और चुनावी डेटाबेस के नियंत्रण जैसे मुद्दे शामिल थे।
हालांकि, चुनाव आयोग ने इन आरोपों के जवाब में कहा था कि SIR सहित सभी फैसले तीन सदस्यीय आयोग ने सर्वसम्मति से लिए हैं। आयोग ने आपत्तियों को निर्णय लेने की प्रक्रिया का हिस्सा बताया था। इस विवाद के बाद विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग तेज कर दी। छात्र संगठनों और विपक्षी नेताओं ने भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली के खिलाफ प्रदर्शन किए।