इफ़्तार समानता और समावेश का संदेश देता है। इफ़्तार कराना तथा गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करना रमज़ान की प्रमुख विशेषताओं में शामिल है। सामूहिक इफ़्तार के अवसर पर लोग धर्म और मतभेद से ऊपर उठकर एक साथ बैठते हैं, जिससे भाईचारे और इंसानियत का संदेश मजबूत होता है। क़ुरआन में बताया गया है कि नेकी केवल पूर्व या पश्चिम की ओर मुख करने में नहीं, बल्कि अपने धन और संसाधनों को रिश्तेदारों, यतीमों, जरूरतमंदों और मुसाफ़िरों पर खर्च करने में है। रमज़ान के महीने में मुसलमान ज़कात, सदक़ा और ख़ैरात अदा करते हैं। ज़कात आर्थिक रूप से सक्षम लोगों पर अनिवार्य है। यदि किसी व्यक्ति की बचत और सोना-चांदी पर एक चंद्र वर्ष पूरा हो जाए और वह निर्धारित सीमा (निसाब) से अधिक हो, तो उस पर 2.5 प्रतिशत ज़कात देना अनिवार्य होता है। यह व्यवस्था समाज में आर्थिक संतुलन स्थापित करने और जरूरतमंदों की सहायता का माध्यम है। हदीस की किताब सहीह बुखारी में वर्णित है कि रब ने अमीरों के माल में गरीबों का हिस्सा रखा है। इस प्रकार ज़कात केवल दान नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और मानवीय जिम्मेदारी का प्रतीक है।
