Skip to content
-
Subscribe to our newsletter & never miss our best posts. Subscribe Now!
  • https://www.facebook.com/
  • https://twitter.com/
  • https://t.me/
  • https://www.instagram.com/
  • https://youtube.com/
Friday Sanwad Friday Sanwad

दुनिया और आख़िरत की कामयाबी के लिए पढ़ते रहना जरूरी है।

Friday Sanwad Friday Sanwad

दुनिया और आख़िरत की कामयाबी के लिए पढ़ते रहना जरूरी है।

  • टॉप न्यूज़
  • देश
  • टेक – ऑटो
  • विदेश
  • जयपुर
  • राजस्थान
  • स्पोर्ट्स
  • Privacy Policy
  • Contact Us
  • टॉप न्यूज़
  • देश
  • टेक – ऑटो
  • विदेश
  • जयपुर
  • राजस्थान
  • स्पोर्ट्स
  • Privacy Policy
  • Contact Us
Close

Search

टॉप न्यूज़

आरएसएस ने फिर उठाई देशभर में एनआरसी की मांग, आंबेकर बोले— साफ हो कौन नागरिक है, कौन नहीं

By Friday Sanwad
October 2, 2026 3 Min Read
0

एसआईआर और जनगणना पर चर्चा के बीच संघ प्रचार प्रमुख का बयान, सीएए और जनसंख्या संतुलन पर भी रखी बात

नई दिल्ली. एसआईआर और जनगणना को लेकर चल रही चर्चा के बीच आरएसएस ने देशभर में नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स (एनआरसी) कराने की मांग दोहराई है। दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान संघ के प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने कहा कि यह साफ होना चाहिए कि कौन भारतीय नागरिक है और कौन नहीं। आंबेकर के अनुसार वोटर लिस्ट में गलत तरीके से शामिल गैर-नागरिकों की पहचान जरूरी है। उन्होंने सीएए के तहत पात्र लोगों को नागरिकता देने और उनकी पहचान एनआरसी के जरिए करने की बात भी कही।
आंबेकर ने कहा कि अगर किसी को एनआरसी की प्रक्रिया पर आपत्ति है तो अदालत समेत कानूनी रास्ते खुले हैं। उनका कहना था कि सिर्फ राजनीतिक कारणों से किसी गैर-नागरिक को भारतीय नागरिक मानना सही नहीं होगा।

पड़ोसी देशों के SC/ST और कमजोर वर्गों का जिक्र

संघ प्रचार प्रमुख ने कहा कि पड़ोसी देशों से भारत आए जो लोग सीएए के तहत नागरिकता के पात्र हैं, उन्हें नागरिकता मिलनी चाहिए। साथ ही पड़ोसी देशों में रह गए SC/ST और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के उत्पीड़न को भी देखा जाना चाहिए।

जनसंख्या संतुलन और विभाजन का हवाला

आंबेकर ने जनसंख्या में बदलाव को 1947 के विभाजन से जोड़ते हुए कहा कि जनसंख्या संतुलन देश की सांस्कृतिक पहचान, एकता और सुरक्षा से जुड़ा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने यह भी कहा कि भारत में जनसंख्या बदलाव की शुरुआत मुस्लिम आक्रमणों के दौर से हुई और संस्कृति की रक्षा की बात को सांप्रदायिक नहीं कहा जा सकता।

समान कानून और अवैध प्रवास पर बात

आंबेकर ने कहा कि कानून सभी के लिए समान होना चाहिए। उन्होंने शादी और बहुविवाह से जुड़े अलग-अलग प्रावधानों, संविधान के अनुच्छेद 29-30 और स्थानीय निकाय चुनावों में जनसंख्या नियंत्रण के नियमों का भी जिक्र किया। अवैध प्रवास को लेकर उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को लंबे समय तक गंभीरता से नहीं लिया गया। उन्होंने 1983 के इलीगल माइग्रेंट्स (डिटरमिनेशन बाय ट्रिब्यूनल्स) एक्ट का उल्लेख किया, जिसे बाद में सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया था।
आंबेकर ने राजनीतिक दलों से संवेदनशील राष्ट्रीय मुद्दों को राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल न करने की अपील की। उनके मुताबिक ऐसे मामलों को केवल ‘सेक्युलर बनाम सांप्रदायिक’ बहस के बजाय देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा के नजरिए से देखा जाना चाहिए।

क्या है एनआरसी

एनआरसी यानी नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स भारतीय नागरिकों की पहचान और उनका रिकॉर्ड दर्ज करने का प्रावधान है। पहली बार एनआरसी 1951 की जनगणना के बाद असम में तैयार किया गया था। नागरिकता नियम, 2003 में भारतीय नागरिकों का राष्ट्रीय रजिस्टर बनाने का प्रावधान जोड़ा गया। असम में एनआरसी की अंतिम सूची 2019 में आई। नागरिकता केंद्र का विषय है, इसलिए देशभर में एनआरसी का फैसला केंद्र सरकार तय कर सकती है। एनआरसी नागरिकों की पहचान का रजिस्टर है, जबकि वोटर लिस्ट मतदान के पात्र मतदाताओं का रिकॉर्ड।

संघ पहले भी करता रहा है मांग

आरएसएस पहले भी देशभर में एनआरसी लागू करने की मांग करता रहा है। 2019 में तत्कालीन आरएसएस महासचिव सुरेश भैयाजी जोशी ने कहा था कि भारतीय नागरिक नहीं होने वाले लोगों की पहचान के लिए एनआरसी तैयार करना सरकार की जिम्मेदारी है। 2019-20 में सीएए और प्रस्तावित एनआरसी पर देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए थे। दिसंबर 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि उनकी सरकार ने सत्ता में आने के बाद एनआरसी पर कोई चर्चा नहीं की है। 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के घोषणापत्र में भी एनआरसी को शामिल नहीं किया गया था।

Author

Friday Sanwad

Follow Me
Other Articles
Previous

राजस्थान नगर निकाय चुनाव: मुस्लिम राजनीति की दशा और दिशा पर उठे नए सवाल

Next

डॉ. सारा और डॉ. सानिया ने डॉक्टर बन किया मां का अधूरा सपना पूरा

No Comment! Be the first one.

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Memories News

Hot Blogs

Copyright 2026 — Friday Sanwad. All rights reserved. frnews.org