दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ने मिर्गी के मरीजों के हित में एक अहम और सराहनीय कदम उठाया है। अब एम्स दिल्ली में मिर्गी से पीड़ित मरीजों के लिए थेरेप्यूटिक ड्रग मॉनिटरिंग (टीडीएम) जांच पूरी तरह मुफ्त की जाएगी। यह वही जांच है, जिसके लिए मरीजों को बाहर निजी लैब में 400 रुपये से लेकर 2,000 रुपये तक खर्च करने पड़ते थे। एम्स प्रशासन ने इस सुविधा को शुरू करने के निर्देश एनसीआई झज्जर समेत सभी संबंधित विभागों और केंद्रों को जारी कर दिए हैं। इस जांच के तहत मिर्गी के इलाज में इस्तेमाल होने वाली प्रमुख दवाओं जैसे फेनोबार्बिटल, कार्बामाजेपाइन, वैल्प्रोइक एसिड और फिनाइटोइन के स्तर की निगरानी की जाएगी। इससे मरीजों को सही खुराक तय करने में मदद मिलेगी और दवाओं से होने वाले दुष्प्रभावों को भी समय रहते पहचाना जा सकेगा। एम्स दिल्ली के बायोकेमिस्ट्री विभाग के डॉ. अशोक शर्मा के अनुसार, थेरेप्यूटिक ड्रग मॉनिटरिंग जांच ब्लड में दवाओं की मात्रा को मापने के लिए की जाती है। इससे यह पता चलता है कि दवा मरीज पर कितना असर कर रही है या कहीं उससे टॉक्सिसिटी तो नहीं हो रही। मिर्गी के मरीजों को अक्सर लंबे समय तक एक से अधिक दवाएं लेनी पड़ती हैं, ऐसे में यह जांच बेहद जरूरी हो जाती है।
मिर्गी एक न्यूरोलॉजिकल बीमारी
यह मुफ्त जांच सुविधा एम्स दिल्ली की ओपीडी में आने वाले मरीजों के लिए कलेक्शन सेंटर, रूम नंबर तीन में सुबह 8:30 बजे से दोपहर 1 बजे तक उपलब्ध होगी। इसके अलावा झज्जर स्थित राष्ट्रीय कैंसर संस्थान (एनसीआई)/ एम्स में भी मरीज इस सुविधा का लाभ ले सकेंगे। मिर्गी एक न्यूरोलॉजिकल बीमारी है, जिसे सही इलाज और नियमित दवा से नियंत्रित किया जा सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि मरीजों को देसी या झूठे इलाज से बचना चाहिए। एम्स की यह पहल न सिर्फ मरीजों का आर्थिक बोझ कम करेगी, बल्कि उनके इलाज को भी अधिक प्रभावी और सुरक्षित बनाएगी।
