कहीं आपकी नेकियाँ बर्बाद तो नहीं हो रहीं?
आज इंसान बाहर से जितना खुश दिखाई देता है, जरूरी नहीं कि अंदर से भी उतना ही सुकून में हो। चेहरे पर मुस्कान हो सकती है, लेकिन दिल में बेचैनी, तनाव और अकेलापन भी हो सकता है। इसलिए हर उदासी को ईमान की कमजोरी समझना सही नहीं है। कई बार इंसान परिस्थितियों, रिश्तों, आर्थिक परेशानियों और अपनी सोच के बोझ से भी मानसिक रूप से थक जाता है। लेकिन हमें अपने जीवन का ईमानदारी से मुहासबा भी करना चाहिए। क्या हम हर समय दूसरों से अपनी तुलना कर रहे हैं? क्या हमें हर किसी को खुश रखने की चिंता रहती है? क्या बीते हुए समय का पछतावा और भविष्य की चिंता हमारे आज का सुकून छीन रही है? क्या दुनिया की चीजों, पैसा, शोहरत और लोगों की तारीफ में हम इतना उलझ गए हैं कि अपने रब से रिश्ता कमजोर हो गया है?
वालिदैन के साथ अच्छा व्यवहार
इस्लामी शिक्षाओं का सार यही है कि दिल का वास्तविक सुकून केवल दुनियावी उपलब्धियों से नहीं मिलता। इंसान जितना अपने रब को याद करता है, अपनी गलतियों पर विचार करता है और नेक रास्ते पर लौटने की कोशिश करता है, उसके भीतर उतना ही संतुलन पैदा होता है। साथ ही, हमारी नेकियाँ केवल व्यक्तिगत इबादत तक सीमित नहीं हैं। वालिदैन के साथ अच्छा व्यवहार, रिश्तेदारों के अधिकारों का सम्मान, पड़ोसियों के साथ भलाई और लोगों को तकलीफ से बचाना भी दीन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। अगर कोई व्यक्ति इबादत तो करता है, लेकिन अपने व्यवहार से दूसरों के दिल दुखाता है, रिश्ते तोड़ता है या लोगों के अधिकारों की अनदेखी करता है, तो उसे अपने आचरण पर भी गंभीरता से विचार करना चाहिए। किसी को अपमानित करना, जानबूझकर तकलीफ देना, रिश्तों में नफरत पैदा करना या किसी का हक दबाना ऐसी बातें हैं जिनसे इंसान को बचना चाहिए। क़ियामत के दिन केवल यह नहीं देखा जाएगा कि हमने कितनी इबादत की, बल्कि लोगों के साथ हमारा व्यवहार कैसा रहा, इसका भी हिसाब होगा।
क्या मैं वास्तव में परेशान हूँ?
इसलिए अपने दिल से पूछिए; क्या मैं वास्तव में परेशान हूँ या अपनी ही गलत प्राथमिकताओं के कारण सुकून खो रहा हूँ? अगर लंबे समय से उदासी, निराशा, बेचैनी या डिप्रेशन जैसी समस्या बनी हुई है, तो इसे केवल ईमान की कमी मानकर चुप न रहें। रब से दुआ और इबादत के साथ किसी भरोसेमंद व्यक्ति से बात करना तथा जरूरत पड़ने पर Psychiatrist या Mental Health Professional की मदद लेना भी समझदारी और सही कदम है। अपने रब से रिश्ता मजबूत कीजिए, लोगों के अधिकार अदा कीजिए, रिश्तों को संभालिए और अपने अख़लाक़ को बेहतर बनाइए।
ऐसी दौलत कमाइए जो दुनिया से जाने के बाद भी आपके काम आए; ईमान, नेक अमल, अच्छे अख़लाक़ और लोगों की दुआएँ। रब हमें सुकून भरा दिल, बेहतर अख़लाक़ और लोगों के हक़ अदा करने की तौफ़ीक़ अता फरमाए। आमीन।