नई दिल्ली। राजधानी के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में 21 दिसंबर को ‘गॉड डज एक्जिस्ट’ पर एक चर्चित बहस हुई। इसमें एक तरफ मशहूर शायर-गीतकार और नास्तिक जावेद अख्तर थे तो दूसरी तरफ इस्लामिक स्कॉलर मुफ्ती शमाइल नदवी। लल्लनटॉप के संपादक सौरभ द्विवेदी ने इस बहस को मॉडरेट किया। मुफ्ती शमाइल कुछ समय से जावेद अख्तर को ‘गॉड डज एक्जिस्ट’ पर ओपन चैलेंज दे रहे थे। बहस के बाद सोशल मीडिया पर आस्था, तर्क और नैतिकता को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कोलकाता में जन्मे मुफ्ती शमाइल अहमद अब्दुल्लाह नदवी एक धार्मिक परिवार से हैं। उन्होंने लखनऊ के दारुल उलूम नदवतुल उलमा से इस्लामिक स्टडीज में ग्रेजुएशन किया और तफ्सीर, उलूमुल कुरान और इफ्ता में पोस्ट ग्रेजुएशन किया। वर्तमान में वे मलेशिया की इंटरनेशनल इस्लामिक यूनिवर्सिटी से पीएचडी कर रहे हैं। नदवी ने 2021 में मरकज अल-वह्यैन नाम का ऑनलाइन इस्लामिक संस्थान स्थापित किया, जहां लाखों छात्र मुफ्त या न्यूनतम फीस पर शिक्षा प्राप्त करते हैं। 2024 में उन्होंने वह्यैन फाउंडेशन की स्थापना की। वे कोलकाता की कोबी बागान मस्जिद में खतीब भी हैं। सोशल मीडिया पर उनके लाखों फॉलोअर्स हैं।
बहस में नदवी ने समझाया कि विज्ञान ईश्वर के अस्तित्व को न साबित कर सकता है, न नकार सकता है। उन्होंने नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज का हवाला देते हुए कहा कि विज्ञान का दायरा भौतिक साक्ष्यों तक सीमित है, जबकि ईश्वर गैर-भौतिक और अलौकिक सत्ता है। उन्होंने कहा कि धर्म विज्ञान को नहीं, बल्कि ‘साइंटिज्म’ को रोकता है, जो ज्ञान का एकमात्र स्रोत विज्ञान को मानता है।

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