नई दिल्ली | लोकसभा चुनाव 2024 और आठ राज्यों के विधानसभा चुनावों वाले साल में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने चुनाव और प्रचार पर रिकॉर्ड तोड़ खर्च किया है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, पार्टी ने 2024–25 में कुल 3,335.36 करोड़ रुपये चुनाव और सामान्य प्रचार पर खर्च किए। यह आंकड़ा 2019–20 में हुए खर्च 1,352.92 करोड़ रुपये से लगभग ढाई गुना है, जब 17वीं लोकसभा और सात विधानसभा चुनाव हुए थे। यह जानकारी बीजेपी की वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट से सामने आई है, जो 27 दिसंबर 2025 को चुनाव आयोग को सौंपी गई थी और इसी हफ्ते सार्वजनिक हुई। रिपोर्ट के अनुसार, 2024–25 में पार्टी का कुल खर्च 3,774.58 करोड़ रुपये रहा, जिसमें से 88% हिस्सा सिर्फ चुनाव और प्रचार पर गया।
इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर 1,124.96 करोड़ रुपये खर्च
खर्च के ब्योरे पर नजर डालें तो “इलेक्शन/जनरल प्रोपेगेंडा” के तहत विज्ञापन और प्रचार सबसे बड़ा मद रहा। इसमें कुल 2,257.05 करोड़ रुपये खर्च हुए, जो कुल चुनावी खर्च का करीब 68% है। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर सबसे ज्यादा 1,124.96 करोड़ रुपये खर्च किए गए, जबकि “विज्ञापन” मद में 897.42 करोड़ रुपये गए। इसके अलावा, हवाई जहाज और हेलीकॉप्टर से यात्रा पर 583.08 करोड़ रुपये खर्च हुए और उम्मीदवारों को वित्तीय सहायता के तौर पर 312.90 करोड़ रुपये दिए गए। चुनाव आयोग के अनुसार, 18वीं लोकसभा और आठ विधानसभा चुनावों से पहले के दो सालों (2023–24 और 2024–25) में बीजेपी का कुल चुनावी खर्च 5,089.42 करोड़ रुपये रहा, जो 17वीं लोकसभा से पहले के दो सालों के खर्च (2,145.31 करोड़ रुपये) से दोगुने से भी ज्यादा है। 2024–25 में महाराष्ट्र, हरियाणा, झारखंड, ओडिशा, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, आंध्र प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में चुनाव हुए थे।
6,124.85 करोड़ रुपये स्वैच्छिक चंदे से
आय के मोर्चे पर भी बीजेपी ने बड़ी छलांग लगाई। पार्टी की कुल आय 2023–24 में 4,340.47 करोड़ रुपये से बढ़कर 2024–25 में 6,769.14 करोड़ रुपये हो गई। इसमें से 6,124.85 करोड़ रुपये स्वैच्छिक चंदे से आए। खास बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा इलेक्टोरल बॉन्ड योजना रद्द किए जाने के बाद भी बीजेपी को मिलने वाले दान में 54% की बढ़ोतरी हुई। रिपोर्ट के मुताबिक, 2024–25 में पार्टी को मिलने वाले कुल योगदान का 61% हिस्सा इलेक्टोरल ट्रस्ट से आया। वहीं, कांग्रेस ने 2024–25 में चुनावों पर 896.22 करोड़ रुपये खर्च किए, जो 2023–24 के 619.67 करोड़ रुपये से ज्यादा है। इससे साफ है कि 2024 के चुनावी साल में राजनीतिक दलों का खर्च और आय दोनों ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गए।
