चूरू में वन क्षेत्र सिर्फ 0.45 प्रतिशत, इसे बढ़ाने के लिए सरकार की क्या योजना: राहुल कस्वां
फ्राइडे संवाद. नई दिल्ली । चूरू जिले में घटते वन क्षेत्र को लेकर लोकसभा में उठाए गए सवाल पर केंद्र सरकार ने अपना जवाब पेश किया है। सांसद राहुल कस्वां ने प्रश्न पूछा था कि क्या चूरू में वन क्षेत्र राष्ट्रीय औसत की तुलना में बेहद कम है और इसे बढ़ाने के लिए सरकार की क्या योजना है। इसके जवाब में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्यमंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने बताया कि इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट (आईएसएफआर) 2023 के अनुसार चूरू जिले में वन क्षेत्र 62.73 वर्ग किलोमीटर है, जो जिले के भौगोलिक क्षेत्रफल का मात्र 0.45 प्रतिशत है। जबकि देश का कुल वन क्षेत्र 21.76 प्रतिशत और राजस्थान का वन क्षेत्र 4.84 प्रतिशत है।मंत्री ने बताया कि चूरू अर्धशुष्क क्षेत्र में आता है, जहां कम वर्षा, सीमित जल उपलब्धता और विरल प्राकृतिक वनस्पति है। यहां देशी और सूखा-सहनशील प्रजातियों के जरिए वृक्षारोपण व पारिस्थितिकी पुनर्स्थापन कार्य किए जा रहे हैं। जिले में स्थित तालछापर वन्यजीव अभयारण्य के संरक्षण के लिए इसे इको-सेंसिटिव जोन भी घोषित किया गया है।जवाब में यह भी बताया गया कि वनों के संरक्षण की मुख्य जिम्मेदारी राज्य सरकारों की है, जबकि केंद्र ग्रीन इंडिया मिशन, नगर वन योजना और कैम्पा जैसी योजनाओं के जरिए राज्यों की मदद करता है। नगर वन योजना के तहत राजस्थान में 1,855.18 हेक्टेयर क्षेत्र की 55 परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं, जिनमें से चूरू जिले में 140 हेक्टेयर की तीन नगर वन परियोजनाएं शामिल हैं।