नई दिल्ली | देश में वर्ष 2027 में प्रस्तावित जनगणना की तैयारियां तेज हो गई हैं। हर दस वर्ष में होने वाली यह प्रक्रिया इस बार पहले से अधिक विस्तृत होगी। केंद्र सरकार ने गजट अधिसूचना जारी कर पहले चरण का ढांचा तय कर दिया है।
पहला चरण 1 अप्रैल से शुरू होगा, जो हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग सेंसस पर आधारित रहेगा। इस दौरान जनगणना अधिकारी घर-घर जाकर मकानों की गिनती करेंगे और रहन-सहन से जुड़ी जानकारियां दर्ज करेंगे। भारत के रजिस्ट्रार जनरल के अनुसार, इसका उद्देश्य देश की वास्तविक सामाजिक और आर्थिक स्थिति का सटीक आंकड़ा तैयार करना है, ताकि विकास योजनाओं को अधिक लक्षित तरीके से लागू किया जा सके।
इंटरनेट और मोबाइल कनेक्टिविटी का भी विवरण
इस बार कुल 33 प्रश्न पूछे जाएंगे। इनमें मकान पक्का या कच्चा होने, दीवार और छत की सामग्री, परिवार के सदस्यों की संख्या, विवाहित जोड़ों की जानकारी और परिवार के मुखिया के लिंग व सामाजिक वर्ग से संबंधित प्रश्न शामिल हैं। इसके अलावा पेयजल, शौचालय, बिजली, रसोई गैस, इंटरनेट और मोबाइल कनेक्टिविटी जैसी बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता का भी विवरण लिया जाएगा। परिवार के पास साइकिल, बाइक या कार जैसे साधन हैं या नहीं, तथा दैनिक उपभोग में किस प्रकार का अनाज प्रमुख है, यह भी दर्ज किया जाएगा।
सही जानकारी देना नागरिक कर्तव्य
जनगणना एक कानूनी प्रक्रिया है और सही जानकारी देना नागरिक कर्तव्य माना जाता है। गलत सूचना देने या जानकारी से इनकार करने पर जुर्माने का प्रावधान है, हालांकि इसका नागरिकता से कोई संबंध नहीं है। सरकार का कहना है कि जनगणना का उद्देश्य किसी की पहचान पर प्रश्न उठाना नहीं, बल्कि विकास की जरूरतों का आकलन करना है। सटीक आंकड़ों के आधार पर ही स्कूल, अस्पताल, सड़क और अन्य बुनियादी सुविधाओं के लिए बजट और योजनाएं तय की जाती हैं।
