फ्राइडे संवाद. जयपुर
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बढ़ते प्रभाव के बीच रत्न एवं आभूषण उद्योग में भी तकनीकी क्रांति की जरूरत महसूस की जा रही है। इस संदर्भ में आर.के. जेम्स के रफीक उल्लाह खान ने जेम्स इंडस्ट्री में एआई के उपयोग को लेकर अपने विचार साझा किए हैं। रफीक उल्लाह खान का मानना है कि पारंपरिक रत्न व्यवसाय को आधुनिक तकनीक से जोड़कर उद्योग में नई संभावनाएं पैदा की जा सकती हैं। उनके अनुसार, एआई तकनीक का उपयोग रत्नों की गुणवत्ता जांच, प्रामाणिकता की पहचान और ग्राहकों की पसंद को समझने में किया जा सकता है।

डिजाइन और ग्राहक अनुभव में सुधार

रफीक उल्लाह ने बताया कि एआई-आधारित सॉफ्टवेयर की मदद से आभूषण डिजाइन में क्रांतिकारी बदलाव लाया जा सकता है। ग्राहकों की पसंद का विश्लेषण कर व्यक्तिगत डिजाइन तैयार किए जा सकते हैं। इसके अलावा, वर्चुअल ट्राई-ऑन तकनीक से ग्राहक खरीदारी से पहले आभूषणों को देख सकते हैं।

गुणवत्ता नियंत्रण और प्रमाणीकरण

रत्नों की पहचान और वर्गीकरण में एआई का उपयोग समय और लागत दोनों बचा सकता है। मशीन लर्निंग तकनीक से नकली रत्नों की पहचान अधिक सटीक हो सकती है। खान ने इन्वेंटरी प्रबंधन, मांग का पूर्वानुमान और लॉजिस्टिक्स में एआई के उपयोग पर जोर दिया। इससे व्यवसाय में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ेगी।

चुनौतियां और समाधान

हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि छोटे व्यवसायियों के लिए एआई तकनीक अपनाना आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इसके लिए सरकारी सहायता और उद्योग संगठनों के सहयोग की जरूरत है। रफीक उल्लाह खान का मानना है कि जो व्यवसायी समय के साथ तकनीक अपनाएंगे, वे ही भविष्य में बाजार में टिक पाएंगे।

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