ट्रंप का ग्रीनलैंड पर दावा: “बल प्रयोग नहीं करूंगा”

दावोस (स्विट्जरलैंड)
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित विश्व आर्थिक मंच (डब्लूईएफ) में कहा कि वह ग्रीनलैंड को अधिग्रहित करने के लिए “बल प्रयोग नहीं करेंगे”, लेकिन साथ ही चेतावनी दी कि यदि यूरोप इस द्वीप पर सशस्त्र संघर्ष करता है तो अमेरिका “अजेय” होगा। ट्रंप की ग्रीनलैंड पर नजर का मुद्दा इस वर्ष के डब्लूईएफ सम्मेलन में केंद्र बिंदु बन गया है। उन्होंने हाल ही में मांग की थी कि अमेरिका को ग्रीनलैंड “आसान तरीके या कठिन तरीके से” हासिल करना चाहिए। 130 से अधिक देशों के 3,000 से अधिक प्रतिनिधियों की उपस्थिति वाले इस आयोजन में 64 राष्ट्र और सरकार प्रमुख शामिल हुए।

यूरोप की प्रतिक्रिया

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने मंगलवार को ट्रंप के रुख की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि फ्रांस “धमकियों की बजाय सम्मान को प्राथमिकता देता है” और ग्रीनलैंड हड़पने की योजना का विरोध करने वाले देशों पर लगाए गए “अस्वीकार्य” टैरिफ को खारिज कर दिया। ट्रंप ने ब्रिटेन, डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड और फिनलैंड को धमकी दी है कि यदि वे डेनमार्क के स्वायत्त क्षेत्र ग्रीनलैंड के अधिग्रहण का समर्थन नहीं करते हैं, तो 1 फरवरी से सभी वस्तुओं पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाया जाएगा, जो जून तक 25 प्रतिशत हो जाएगा।

क्यों है ग्रीनलैंड महत्वपूर्ण?

विश्व का सबसे बड़ा द्वीप ग्रीनलैंड आर्कटिक सर्कल में स्थित है और सामरिक तथा आर्थिक दृष्टि से अत्यंत मूल्यवान है। भौगोलिक रूप से यह उत्तरी अमेरिका का हिस्सा है, जो कनाडा के पूर्वोत्तर में और आइसलैंड के पश्चिम में स्थित है। ग्रीनलैंड का लगभग 80 प्रतिशत भाग बर्फ से ढका है। इसकी लगभग 56,000 की आबादी मुख्यतः तटीय क्षेत्रों में रहती है। राजधानी नूक में द्वीप की एक-तिहाई आबादी निवास करती है।

राष्ट्रीय और विश्व सुरक्षा के लिए अनिवार्य

व्हाइट हाउस की मंगलवार की मीडिया ब्रीफिंग में ट्रंप ने कहा कि ग्रीनलैंड “राष्ट्रीय और विश्व सुरक्षा के लिए अनिवार्य” है। यह विवाद नाटो गठबंधन में दरार और संभावित व्यापार युद्ध का खतरा बन गया है, जिससे शेयर बाजारों में भी उथल-पुथल मची है। यूरोपीय नेताओं ने चेतावनी दी है कि यह विवाद अटलांटिक गठबंधन को कमजोर कर सकता है।