पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर, अमेरिका-सऊदी हमलों और ईरानी मिसाइल कार्रवाई से क्षेत्रीय युद्ध की आशंका गहराई मिस्र, तुर्की और लेबनान की सक्रिय कूटनीति के बीच ईरान ने हार्मुज को लेकर ओमान का प्रस्ताव ठुकराया
फ्राइडे संवाद. मस्कट । पश्चिम एशिया में सैन्य टकराव और कूटनीतिक हलचल एक साथ तेज हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि जॉर्डन स्थित एक अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर ईरान की ओर से किए गए मिसाइल हमले का करारा जवाब दिया जाएगा। इसी बीच अमेरिका और सऊदी अरब की सेनाओं ने संयुक्त रूप से इराक में ईरान-समर्थित पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सेज (पीएमएफ) के ठिकानों पर हवाई हमले किए, जिसमें कम से कम 20 लड़ाके मारे गए और 32 अन्य घायल हुए। ये हमले इराक के सात प्रांतों में किए गए और सऊदी अरब के तेल प्रतिष्ठानों पर हुए कथित ड्रोन हमलों के जवाब में बताए जा रहे हैं। इराक की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने कहा है कि वह पड़ोसी देशों की संप्रभुता की रक्षा और हमलों को रोकने के लिए एक योजना पर काम कर रही है। वहीं सऊदी अरब पर हुए हमलों को लेकर लेबनान के सांसद अशरफ रिफी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इराकी मिलिशिया द्वारा किए गए ड्रोन हमलों की निंदा करते हुए इसे क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता के लिए खतरा बताया। रिफी ने इन हमलों को ईरान समर्थित मिलिशिया की एक व्यवस्थित नीति का हिस्सा करार दिया, जिसका मकसद क्षेत्र को अस्थिर कर बलपूर्वक अपना एजेंडा थोपना है। उन्होंने सऊदी अरब के साथ एकजुटता जताते हुए अरब देशों से इस मुद्दे पर स्पष्ट रुख अपनाने की मांग की। गजा में मानवीय सहायता बढ़ाने के लिए हरसंभव प्रयास जारी: तुर्की इसी दौरान मिस्र के तेल भंडारण टैंकर पर भी ड्रोन हमले की खबर सामने आई है। समुद्री सुरक्षा एजेंसी एम्ब्रे के अनुसार, भूमध्य सागर पर स्थित मिस्र के दमियेटा बंदरगाह पर एक अमेरिकी स्वामित्व वाले गैस भंडारण टैंकर को ड्रोन ने निशाना बनाया। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि उन्हें इस घटना के बारे में जानकारी दी गई है। इस घटनाक्रम के बीच मिस्र के विदेश मंत्री बद्र अब्देलत्ती ने अमेरिका के मध्य पूर्व विशेष दूत स्टीव विटकॉफ से टेलीफोन पर बातचीत की और क्षेत्र में तनाव कम करने के प्रयासों पर चर्चा की। मिस्र के विदेश मंत्रालय के अनुसार, अब्देलत्ती ने अच्छे पड़ोसी संबंधों, अंतरराष्ट्रीय कानून के पूर्ण पालन तथा देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान की आवश्यकता पर बल दिया। कूटनीतिक मोर्चे पर तुर्की भी सक्रिय नजर आया। तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने हमास के राजनीतिक ब्यूरो के नवनियुक्त प्रमुख खलील अल-हय्या से मुलाकात की। तुर्की के विदेश मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार फिदान ने अल-हय्या को उनकी नियुक्ति पर बधाई दी, जबकि अल-हय्या ने उन्हें गजा और पश्चिमी तट की मौजूदा स्थिति के साथ-साथ यरुशलम के पवित्र स्थलों पर हो रहे हमलों की जानकारी दी। तुर्की ने गजा में मानवीय सहायता बढ़ाने के लिए हरसंभव प्रयास जारी रखने और शांति प्रक्रिया का समर्थन करते रहने की बात दोहराई।
दूसरी ओर, ईरान ने हार्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े पारगमन मार्गों को विभाजित करने के ओमान के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। तेहरान ने इसके बजाय अंदर आने वाले मार्ग पर पूर्ण नियंत्रण और बाहर जाने वाले मार्ग पर आंशिक नियंत्रण की मांग की है, जिससे क्षेत्र में तनाव और गहराने की आशंका है। विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम पश्चिम एशिया में शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकता है।