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राजस्थान

बिना दहेज़- बिना बारात: लाडनूं में सुन्नत के मुताबिक़ निकाह बना मिसाल

By Friday Sanwad
November 13, 2025 2 Min Read
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एफआर न्यूज. लाडनूं। इस दौर में जब शादियों में दिखावा, फ़िज़ूलख़र्ची और गैर-इस्लामी रस्में आम हो गई हैं, वहीं लाडनूं के शकील खान पुत्र सदिक खान (बड़ा बास) ने मिसाल पेश की है। उन्होंने बिना दहेज़, बिना बारात और बिना किसी दिखावे के सुन्नत के मुताबिक़ निकाह किया। यह निकाह उन तमाम लोगों के लिए एक सबक है जो बान, भात, मेहँदी, रातीजगा जैसी गैर-इस्लामी रस्मों और फ़िज़ूलख़र्ची में उलझे हुए हैं। शकील खान ने इस्लामी तालीमात का पालन करते हुए सादगी से निकाह संपन्न कराया, जो समाज के लिए एक रोशन उदाहरण है।

दिखावे की परंपरा से निकाह मुश्किल

इस्लाम में निकाह को सरल और आसान बनाया गया है, लेकिन आज समाज में शादियों में भारी-भरकम ख़र्च, दहेज़ की मांग और दिखावे की परंपरा ने इसे मुश्किल बना दिया है। हज़रत मुहम्मद (स.अ.व) ने फ़रमाया था कि सबसे बेहतरीन निकाह वह है जो सबसे कम ख़र्च में हो।
शकील खान के इस क़दम ने साबित किया कि अगर नियत साफ़ हो और इस्लामी तालीमात पर अमल करने की ख़्वाहिश हो, तो सादगी से भी बेहतरीन निकाह किया जा सकता है। इस मौक़े पर परिवार और दोस्तों ने भी इस नेक अमल की सराहना की और दुआएं कीं।

समाज के लिए संदेश

इस निकाह ने समाज को यह संदेश दिया है कि शादियों में असली अहमियत रिश्ते की पवित्रता और सुन्नत के मुताबिक़ अमल करने में है, न कि दिखावे और रस्मों में। अगर हर मुसलमान इस तरह की सादगी अपनाए, तो न सिर्फ़ आर्थिक बोझ कम होगा बल्कि इस्लामी तालीमात को भी ज़िंदा रखा जा सकेगा। स्थानीय लोगों ने शकील खान और उनके परिवार को मुबारकबाद दी और नवविवाहित जोड़ी के लिए दुआएं कीं। सभी ने कहा कि परवरदिगार इस नेक अमल को क़ुबूल फ़रमाए और दोनों को हमेशा ख़ुश और सलामत रखे। यह निकाह एक मिसाल है कि सुन्नत पर अमल करना कितना आसान और बरकत वाला है। “परवरदिगार तुम्हें बरकत दे, तुम पर रहमत नाज़िल करे और तुम दोनों को भलाई में जोड़े रखे।”

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